Wednesday, March 11, 2026

खाड़ी देशों से अधिक उड़ानें संचालित करेंगी Indian Airlines

भारतीय एयरलाइंस बुधवार को युद्ध प्रभावित खाड़ी क्षेत्र से और अधिक उड़ानें संचालित करने के लिए तैयार हैं। केंद्र सरकार पश्चिम एशिया क्षेत्र में चल रहे घटनाक्रम और इसके भारत व उस क्षेत्र के बीच हवाई यात्रा पर संभावित प्रभाव पर करीबी नजर बनाए हुए है। एयरलाइनों की परिचालन योजनाओं के अनुसार, एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस 12 मार्च से रियाद के लिए उड़ानें संचालित करेंगी जबकि इंडिगो उसी तिथि से मुंबई-रियाद-मुंबई सेवाएं शुरू करेगी।


नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने जारी बयान में कहा, “स्पाइसजेट को क्षेत्र में सतत परिचालन सुरक्षा और लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक हवाईअड्डा अनुमोदन प्राप्त करने में सुविधा दी गई है। आकासा एयर को सलाह दी गई है कि वह मुंबई-रियाद-मुंबई सेवाओं की अपनी योजनाबद्ध शुरुआत को प्रचलित परिचालन परिस्थितियों के अनुरूप समायोजित करे, जिसे 12 मार्च से संचालन शुरू करने के लिए निर्धारित किया गया है।”


एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस 11 मार्च को पश्चिम एशिया क्षेत्र के लिए और वहां से कुल 58 निर्धारित व अनिर्धारित उड़ानें संचालित करेंगी। एयरलाइन के अनुसार, दोनों एयरलाइंस 11 मार्च को जेद्दा और मस्कट के लिए और वहां से अपनी निर्धारित सेवाओं को जारी रखेंगी। जेद्दा के लिए कुल 8 उड़ानें संचालित करेंगी और एयर इंडिया एक्सप्रेस मस्कट के लिए 14 निर्धारित उड़ानें संचालित करेगी।


9 मार्च के परिचालन डेटा के अनुसार, भारतीय वाहकों द्वारा संचालित 45 आगमन उड़ानें पश्चिम एशिया से भारत पहुंचीं, जिनमें 7,407 यात्री सवार थे।


नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू लगातार स्थिति पर नजर रख रहे हैं और तेज व समन्वित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित हितधारकों के साथ सीधे जुड़ाव बनाए हुए हैं। मंत्रालय ने कहा, “एयरलाइंस विकसित हो रही स्थिति के अनुसार उचित परिचालन प्रबंध कर रही हैं, जिसमें यात्री सुरक्षा और सेवाओं की निरंतरता प्राथमिक विचार बने हुए हैं।”


डीजीसीए ने अतिरिक्त आगमन और प्रस्थान स्लॉट की सुविधा देने और मस्कट अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे का उपयोग दुबई, अबू धाबी, शारजाह, रास अल खैमाह, अल-अलन, फुजैरा, शारजाह, जेद्दा और मदीना सहित गंतव्यों के लिए मार्गगत वैकल्पिक हवाईअड्डे के रूप में करने की अनुमति देने के लिए संबंधित प्राधिकरणों के साथ समन्वय किया है।


मंत्रालय ने कहा कि वह एयरलाइनों और अन्य संबंधित हितधारकों के साथ नियमित समन्वय बनाए रख रहा है ताकि यात्रियों का आवागमन सुव्यवस्थित रूप से जारी रहे। टिकट दरों की भी बारीकी से निगरानी की जा रही है ताकि टिकट कीमतें उचित बनी रहें और इस अवधि के दौरान कोई अनुचित वृद्धि न हो।


यात्री अपने उड़ान समय और यात्रा प्रबंधों के नवीनतम अपडेट के लिए अपनी-अपनी एयरलाइन से संपर्क बनाए रखें। मंत्रालय स्थिति की समीक्षा करता रहेगा और आवश्यकतानुसार आगे जानकारी प्रदान करेगा।

ICC T20 Rankings: क्या है टी-20 रैंकिंग, जानिए दुनिया का नंबर-1 टी20 बल्लेबाज, गेंदबाज और ऑलराउंडर

ICC T20 Rankings: टी20 वर्ल्ड कप 2026 के बाद ICC ने ताजा टी20 इंटरनेशनल रैंकिंग जारी कर दी है। नई रैंकिंग में बल्लेबाजी, गेंदबाजी और ऑलराउंडर तीनों कैटेगरी में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। खास बात यह है कि बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा नजर आ रहा है। टी20 वर्ल्डकप के बाद ICC की ताजा टी20 रैंकिंग में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला है। बल्लेबाजी में अभिषेक शर्मा नंबर 1 पर पहुंच गए हैं, जबकि गेंदबाजी में वरुण चक्रवर्ती शीर्ष स्थान पर हैं।


बल्लेबाजी रैंकिंग में अभिषेक शर्मा टॉप पर

आईसीसी की ताजा टी20 बल्लेबाजी रैंकिंग में अभिषेक शर्मा पहले स्थान पर पहुंच गए हैं। उनके खाते में 874 रेटिंग पॉइंट्स हैं और शानदार फॉर्म की बदौलत उन्होंने दुनिया के कई बड़े बल्लेबाजों को पीछे छोड़ दिया है। दूसरे स्थान पर साहिबजादा फरहान हैं, जिनके 848 रेटिंग पॉइंट्स हैं। वहीं इंग्लैंड के फिस सॉल्ट 803 पॉइंट्स के साथ तीसरे नंबर पर मौजूद हैं।  भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन भी टॉप-5 में जगह बनाने में सफल रहे हैं। वह 783 रेटिंग पॉइंट्स के साथ चौथे स्थान पर हैं। इसके अलावा श्रीलंका के पथुम निसांका पांचवें नंबर पर हैं। टॉप-10 में भारत के और भी खिलाड़ी शामिल हैं। तिलक वर्मा छठे और सूर्यकुमार यादव सातवें स्थान पर मौजूद हैं। वहीं साउथ अफ्रीका के डिवॉल्ड ब्रेविस 8वें नंबर पर हैं। इंग्लैंड के जोस बटलर नौवें और न्यूजीलैंड के टिम सीफर्ट 10वें स्थान पर हैं। 


गेंदबाजी में वरुण चक्रवर्ती नंबर 1

गेंदबाजी रैंकिंग की बात करें तो भारत के स्पिनर वरुण चक्रवर्ती  771 रेटिंग पॉइंट्स के साथ दुनिया के नंबर 1 टी20 गेंदबाज बन गए हैं। दूसरे स्थान पर अफगानिस्तान के स्टार स्पिनर राशिद खान हैं, जिनके 753 पॉइंट्स हैं। पाकिस्तान के अबरार अहमद तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। वहीं साउथ अफ्रीका के कॉर्बिन बॉश चौथे, इंग्लैंड के अनुभवी स्पिनर आदिल राशिद पांचवें और ऑस्ट्रेलिया के एडम जम्पा छठे स्थान पर हैं। भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह भी टॉप-10 में शामिल हैं और वह सातवें स्थान पर काबिज हैं। उनकी शानदार गेंदबाजी ने टी20 वर्ल्ड कप में भी टीम इंडिया की जीत में अहम भूमिका निभाई थी।


ऑलराउंडर रैंकिंग में सिकंदर रजा शीर्ष पर

ऑलराउंडर रैंकिंग में जिम्बाब्वे के स्टार खिलाड़ी सिकंदर रजा पहले स्थान पर हैं और उनके 328 रेटिंग पॉइंट्स हैं। भारत के स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या 284 पॉइंट्स के साथ दूसरे नंबर पर मौजूद हैं। पाकिस्तान के युवा खिलाड़ी साइम अयूब तीसरे स्थान पर हैं। इसके अलावा भारत के शिवम दुबे भी टॉप-10 ऑलराउंडर की सूची में शामिल हैं और वह नौवें नंबर पर हैं।


भारतीय खिलाड़ियों का दिखा दबदबा

नई आईसीसी टी20 रैंकिंग में भारतीय खिलाड़ियों की मजबूत मौजूदगी साफ दिखाई देती है। बल्लेबाजी, गेंदबाजी और ऑलराउंडर तीनों कैटेगरी में भारत के कई खिलाड़ी टॉप-10 में शामिल हैं, जो टीम की मौजूदा मजबूत स्थिति को दर्शाता है। 

मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी ने नियुक्ति आदेश किए जारी

मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड द्वारा राज्य की विद्युत उत्पादन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए सीधी भर्ती प्रक्रिया में चयनित 46 अभ्यर्थियों को नियुक्ति आदेश जारी किए गए हैं। चयनित अभ्यर्थियों के नियुक्ति आदेश कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट https://www.mppgcl.mp.gov.in के कैरियर अनुभाग में अपलोड कर दिए गए हैं।


राज्य की विद्युत कंपनियों में सीधी भर्ती के माध्यम से नियमित अंतराल पर रिक्त पदों की पूर्ति की जा रही है। मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी द्वारा दिनांक 7 जुलाई 2025 को वर्ग-2, वर्ग-3 एवं वर्ग-4 के अंतर्गत 18 विभिन्न पदों की पूर्ति के लिये भर्ती विज्ञापन जारी किया गया था। इसके अंतर्गत कंप्यूटर आधारित परीक्षा का आयोजन 3 से 5 नवंबर 2025 के बीच राज्य के विभिन्न शहरों में स्थित परीक्षा केंद्रों पर सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया। इसके पूर्व पिछले माह कंपनी द्वारा दस्तावेज सत्यापन तथा निर्धारित पदों के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षण की प्रक्रिया पूर्ण उपरांत 180 अभ्यर्थियों की सूची जारी की गई थी।


जारी नियुक्ति आदेशों के अनुसार वर्ग-2 के पदों के लिए चयनित 46 अभ्यर्थियों में सहायक अभियंता (यांत्रिकी) प्रशिक्षु 8, सहायक अभियंता (इलेक्ट्रिकल) प्रशिक्षु 5, सहायक अभियंता (इलेक्ट्रॉनिक्स) प्रशिक्षु 7, सहायक अभियंता (सिविल) प्रशिक्षु 16, पाली (शिफ्ट) रसायनज्ञ प्रशिक्षु 8 और कार्मिक अधिकारी प्रशिक्षु 2 अभ्यर्थी शामिल हैं। नियुक्ति आदेश पत्रों में अभ्यर्थियों के लिए पदस्थापना स्थल, रिपोर्टिंग की तिथि, समय-सीमा तथा आवश्यक दस्तावेजों से संबंधित विस्तृत निर्देश दिए गए हैं। सभी चयनित अभ्यर्थियों से अपेक्षा की गई है कि वे निर्देशों का अवलोकन कर आवश्यक दस्तावेजों के साथ निर्धारित समय-सीमा के भीतर संबंधित कार्यालय में उपस्थित होकर कार्यभार ग्रहण करें।


वर्ग-3 व वर्ग-4 के पद जिनमें कनिष्ठ अभियंता संयंत्र – अभियांत्रिकी, कनिष्ठ अभियंता संयंत्र–इलेक्ट्रिकल, कनिष्ठ अभियंता संयंत्र – इलेक्ट्रॉनिक्स, कनिष्ठ अभियंता सिविल, संयंत्र सहायक अभियांत्रिकी, संयंत्र सहायक इलेक्ट्रिकल, कार्यालय सहायक श्रेणी-3, भंडार सहायक, कनिष्ठ शीघ्रलेखक, अग्निशामक, सुरक्षा सैनिक, वार्ड बॉय शामिल हैं, के आदेश भी पॉवर जनरेटिंग कंपनी द्वारा शीघ्र जारी किए जाएंगे।

Tuesday, March 10, 2026

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना के लिए ‘डिफेंस फोर्सेज विजन’ रोडमैप किया जारी

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को साउथ ब्लॉक में भारतीय सेना के लिए ‘डिफेंस फोर्सेज विजन’ रोडमैप जारी किया। यह बड़ा ब्लूप्रिंट हेडक्वार्टर इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ ने रक्षा बलों को आधुनिक, इंटीग्रेटेड और तकनीक से लैस सेना में बदलने के लिए तैयार किया है, जो 2047 तक भारत के विकसित देश बनने के सपने को पूरा करने में मदद कर सके। यह डॉक्यूमेंट भविष्य की युद्ध चुनौतियों के लिए ढलने वाली सेना बनाने के लिए इनोवेशन, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और मॉडर्न ट्रेनिंग फ्रेमवर्क के महत्व पर भी जोर देता है।


इस विजन डॉक्यूमेंट में सशस्त्र बलों में जरूरी सामरिक सुधारों के बारे में बताया गया है


इस विजन डॉक्यूमेंट में सशस्त्र बलों में जरूरी सामरिक सुधारों, क्षमता बढ़ाने और संगठनात्मक बदलावों के बारे में बताया गया है, ताकि बदलते भू-रणनीतिक, तकनीकी और सुरक्षा माहौल से अच्छे से निपटा जा सके। इसमें सेना को एक इंटीग्रेटेड, मल्टी-डोमेन और फुर्तीली फोर्स में बदलने की सोची गई है, जो दुश्मनों को रोकने, हर तरह के झगड़े में जवाब देने और तेजी से बदलते ग्लोबल और रीजनल हालात के बीच बढ़ते स्ट्रेटेजिक हितों की रक्षा करने में काबिल हो। इस विजन का एक मुख्य हिस्सा सेनाओं के बीच तालमेल और तालमेल पर जोर देना है, जिससे प्लानिंग, ऑपरेशन और क्षमता विकास में ज़्यादा तालमेल को बढ़ावा मिलेगा।

 

इस विजन में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर ध्यान केंद्रित किया गया है


रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इस विजन में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर ध्यान केन्द्रित किया गया है, जो देश की खास सुरक्षा जरूरतों के हिसाब से स्वदेशी तकनीक और समाधान अपनाने को बढ़ावा देता है। घरेलू रक्षा विनिर्माण और प्रौद्योगिकी क्षमताओं को मजबूत करने से ऑपरेशनल तैयारी बढ़ने और देश की ग्रोथ में योगदान देने की उम्मीद है। विजन डॉक्यूमेंट में शॉर्ट-टर्म, मिड-टर्म और लॉन्ग-टर्म टाइमलाइन में साफ तौर पर प्राथमिकता वाले क्षमता लक्ष्यों के साथ एक कैलिब्रेटेड रोडमैप अपनाया गया है। यह विश्व स्तरीय डिफेंस फोर्स बनाने के लिए जरूरी सैन्य क्षमताओं, संस्थागत सुधारों और रणनीतिक साझेदारी के विकास में सहयोग करेगा।


यह विजन डॉक्यूमेंट पूरे देश के नजरिए की जरूरत पर देता है जोर 


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों की जटिलता को पहचानते हुए यह विजन डॉक्यूमेंट पूरे देश के नजरिए की जरूरत पर जोर देता है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा पक्की करने के लिए सैन्य ताकत को कूटनीतिक, तकनीकी और आर्थिक ताकत के साथ जोड़ा जाएगा। लगातार सुधारों, इनोवेशन और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के जरिए इसका मकसद यह पक्का करना है कि भारत की आजादी की सौवीं सालगिरह तक देश की सेना दुनिया भर में सम्मानित, टेक्नोलॉजिकली एडवांस्ड और लड़ाई के लिए तैयार मिलिट्री के तौर पर खड़ी हो, जो मजबूत विकसित भारत में योगदान दे।


इस मौके पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, सेना उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह और दूसरे वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

संक्रमण और थकान हो सकते हैं Aplastic Anemia के संकेत

एप्लास्टिक एनीमिया एक दुर्लभ और गंभीर ब्लड डिसऑर्डर है, जिसमें बोन मैरो पर्याप्त मात्रा में रेड ब्लड सेल्स, व्हाइट ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स का निर्माण नहीं कर पाता। भारत में हर साल कई लोगों की मृत्यु एप्लास्टिक एनीमिया के कारण होती है। कई मरीजों में इसका सही कारण पता नहीं चल पाता, लेकिन यह स्थिति ऑटोइम्यून डिसऑर्डर्स, वायरल इंफेक्शन्स और कुछ टॉक्सिक सब्सटेंसेस, केमिकल्स और रेडिएशन के कॉन्टैक्ट से जुड़ी हो सकती है।


कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक हीमेटो-ऑन्कोलॉजी एवं बीएमटी, के अनुसार बोन मैरो शरीर का ब्लड सेल बनाने वाला मुख्य केंद्र होता है। जब यह केंद्र धीमा पड़ जाता है या काम करना बंद कर देता है, तो इसके परिणाम जानलेवा हो सकते हैं। मरीज बार-बार इंफेक्शन, अत्यधिक थकान और अनकंट्रोल्ड ब्लीडिंग के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं। हालांकि एप्लास्टिक एनीमिया एक गंभीर डिसऑर्डर है, लेकिन इसके प्रभावी इलाज उपलब्ध हैं। कई योग्य मरीजों के लिए ब्लड स्टेम सेल ट्रांसप्लांट एक संभावित इलाज और जीवन का दूसरा अवसर दे सकता है।


भारतीय आंकड़े बताते हैं कि बोन मैरो फेल्योर सिंड्रोम में एप्लास्टिक एनीमिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कई मरीज डॉक्टर के पास तब पहुंचते हैं जब लैबोरेटरी रिपोर्ट में पैनसाइटोपेनिया पाया जाता है, यानी शरीर में रेड ब्लड सेल्स, व्हाइट ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स की कमी। इंडियन जर्नल ऑफ हेमेटोलॉजी एंड ब्लड ट्रांसफ्यूजन में प्रकाशित शोध में बताया गया है कि भारत में बोन मैरो फेल्योर के मामलों का बड़ा हिस्सा एप्लास्टिक एनीमिया के कारण होता है।


रिकॉर्ड के अनुसार, भारत में मरीज पश्चिमी देशों की तुलना में कम उम्र में ही बीमारी के लक्षण दिखाने लगते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि जागरूकता और समय पर पहचान कितनी आवश्यक है।


एप्लास्टिक एनीमिया में क्या होता है?


एक सामान्य शरीर में बोन मैरो लगातार रेड ब्लड सेल्स बनाता है, जो शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाते हैं; व्हाइट ब्लड सेल्स, जो इंफेक्शन्स से लड़ते हैं; और प्लेटलेट्स, जो ब्लीडिंग रोकते हैं। एप्लास्टिक एनीमिया में यह निर्माण प्रक्रिया रुक जाती है। अधिकतर मामलों में इम्यून सिस्टम ब्लड बनाने वाली स्टेम सेल्स पर हमला कर उन्हें नष्ट कर देता है, जो रक्त के सभी कंपोनेंट्स के निर्माण के लिए जिम्मेदार होती हैं।


जैसे-जैसे ब्लड सेल्स की संख्या घटती है, लक्षण दिखाई देने लगते हैं। हीमोग्लोबिन कम होने से लगातार थकान, कमजोरी, हल्का काम करने पर भी सांस फूलना और पीलापन दिखाई देता है। व्हाइट ब्लड सेल्स की कमी से मरीज बार-बार या गंभीर इंफेक्शन के शिकार हो जाते हैं। प्लेटलेट्स कम होने से आसानी से चोट लगना, मसूड़ों या नाक से ब्लीडिंग होना, छोटे कट पर भी देर तक ब्लीडिंग रहना और त्वचा पर नीले निशान पड़ना जैसे लक्षण दिखते हैं।


डॉक्टर हीमोग्लोबिन, व्हाइट ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स की कमी की इस स्थिति को पैनसाइटोपेनिया कहते हैं। समय पर कम्प्लीट ब्लड काउंट और आवश्यकता होने पर बोन मैरो जांच कर सही डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट शुरू करना बहुत जरूरी है।


क्या इसका उपचार संभव है?


हाँ। इलाज का चुनाव बीमारी की गंभीरता, मरीज की उम्र और उसकी हेल्थ कंडीशन पर निर्भर करता है। कुछ मामलों में इम्यूनोसप्रेसिव दवाओं से बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे ब्लड सेल्स की संख्या बढ़ सकती है। लेकिन कई मरीजों, खासकर गंभीर रूप से प्रभावित युवाओं के लिए, ब्लड स्टेम सेल ट्रांसप्लांट सबसे प्रभावी और आशाजनक ट्रीटमेंट हो सकता है।


ट्रांसप्लांट की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि डोनर का एचएलए प्रोफाइल मरीज से कितना मैच करता है। डॉक्टर 10/10 एचएलए मैच की तलाश करते हैं, जिससे कॉम्प्लिकेशन्स कम हों और रिजल्ट बेहतर मिलें। दुर्भाग्य से, परिवार में उपयुक्त मैच केवल लगभग 30 प्रतिशत मरीजों को ही मिल पाता है। बाकी 70 प्रतिशत मरीज नेशनल या इंटरनेशनल रजिस्ट्रियों में दर्ज अनरिलेटेड डोनर्स पर निर्भर रहते हैं।


भारत में रजिस्टर्ड ब्लड स्टेम सेल डोनर्स की संख्या अभी कम है जिसके कारण मरीजों के लिए ट्रांसप्लांट तक पहुंच काफी सीमित हो जाती है।


गलत जानकारी डोनर रजिस्ट्रेशन में बड़ी बाधा है। दर्द, लंबे समय तक हेल्थ पर असर या फर्टिलिटी पर प्रभाव जैसी गलत धारणाएं लोगों को हतोत्साहित करती हैं। वास्तव में, ब्लड स्टेम सेल डोनेशन एक सुरक्षित और वॉलंटरी प्रक्रिया है और ज्यादातर मामलों में प्लेटलेट्स डोनेशन के समान होती है।


एप्लास्टिक एनीमिया के मैनेजमेंट के लिए सरकारी सपोर्ट, डोनर रजिस्ट्रेशन कैंपेन और डोनर पूल बढ़ाने की आवश्यकता है। बार-बार इंफेक्शन, अत्यधिक थकान, बिना कारण ब्लीडिंग और नीले निशान जैसे लक्षणों की समय पर पहचान से जल्दी डायग्नोसिस और रेफरल संभव है। साथ ही, डोनर बेस मजबूत करने से पूरे भारत में हजारों मरीजों को जीवनदान दिया जा सकता है।

मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2025: नवीन इलेक्ट्रिक वाहनों के पंजीयन शुल्क (Registration Fee) एवं मोटरयान कर (Road Tax) में विशेष छूट

नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा प्रदेश में स्वच्छ, सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल परिवहन तंत्र को सुदृढ़ करने और कार्बन उत्सर्जन के न्यूनीकरण के उद्देश्य से "मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2025" का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है। यह दूरदर्शी नीति 27 मार्च 2025 से संपूर्ण प्रदेश में प्रभावशील हो चुकी है, जिसमें पर्यावरण संवर्धन के लिये इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के क्रय एवं उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए नागरिकों को व्यापक स्तर पर विभिन्न वित्तीय रियायतें एवं विशिष्ट प्रोत्साहन प्रदान किए जा रहे हैं। शासन की इस पहल का मुख्य ध्येय पारंपरिक ईंधन आधारित वाहनों के स्थान पर आधुनिक एवं प्रदूषण मुक्त आवागमन के साधनों को जन-सामान्य के लिए सुलभ बनाना है।


राज्य शासन की इस अभिनव नीति में नवीन इलेक्ट्रिक वाहनों के क्रय पर उपभोक्ताओं को पंजीयन शुल्क (Registration Fee) एवं मोटरयान कर (Road Tax) में विशेष छूट प्रदान की जा रही है। यह निर्णय न केवल नागरिकों को आर्थिक संबल प्रदान कर रहा है, अपितु उन्हें भविष्योन्मुखी परिवहन व्यवस्था से जुड़ने के लिये प्रेरित भी कर रहा है। इसके अतिरिक्त, धारणीय विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये पेट्रोल, डीजल एवं सीएनजी संचालित पारंपरिक वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित (रेट्रोफिट) करने की तकनीक को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसके लिए नियमानुसार समुचित वित्तीय सहायता सुलभ कराई जा रही है।


चार्जिंग अधोसंरचना विकास के लिये 30 प्रतिशत तक का अनुदान


अधोसंरचना विकास की दिशा में प्रदेश को 'इलेक्ट्रिक व्हीकल हब' के रूप में स्थापित करने के लिये राज्य सरकार द्वारा सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन अथवा चार्जरों की स्थापना पर लगभग 30 प्रतिशत तक के अनुदान (सब्सिडी) का प्रावधान किया गया है। इस दूरगामी कदम से प्रदेश भर में चार्जिंग स्टेशनों के व्यापक तंत्र का विस्तार होगा, जिससे नागरिकों को वाहन को सुगम एवं निर्बाध यात्रा का अनुभव प्राप्त हो सकेगा।


"ईव्ही तरंग पोर्टल" के माध्यम से योजनाओं का सुगम लाभ


EV वाहनों पर प्रोत्साहनों के लाभ वितरण की प्रक्रिया को अत्यंत सरल, पारदर्शी एवं तकनीक-आधारित बनाने के उद्देश्य से शासन द्वारा "ईव्ही तरंग पोर्टल" का संचालन किया जा रहा है। इस डिजिटल अधिष्ठान के माध्यम से पात्र हितग्राही विभिन्न सब्सिडी एवं अन्य लाभों के लिए घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। राज्य शासन ने समस्त प्रदेशवासियों से आह्वान किया है कि वे इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता देकर 'स्वच्छ एवं हरित मध्यप्रदेश' के संकल्प को साकार करने में अपनी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करें।

कैसा हो एआई युग का रेज्यूमे ? ऐसे प्रोजेक्ट्स चुनें जिन्हें मशीन रिप्लेस न कर सके

New York | एआई की वजह से नौकरियां जाने का डर अभी सभी को सता रहा है, खास तौर पर युवा वर्ग ज्यादा परेशान नजर आ रहा है। लेकिन प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर फर्म  के CEO  कहते हैं कि घबराने की जरूरत नहीं, बस रणनीति बदलनी होगी। जो कई बड़ी  दिग्गज कंपनियों में काम कर चुके हैं। उनका कहना है कि सिलिकॉन वैली में नौकरी पाना पहले भी आसान नहीं था। 


खुद इंग्लैंड के छोटे शहर से निकले जो ने कभी सीधे किसी बड़ी कंपनी में एंट्री नहीं ली। उनकी सलाह यह है कि ऐसा रेज्यूमे बनाएं जिसे नजरअंदाज करना नामुमकिन हो। किसी स्टंट से नहीं, बल्कि ऐसे प्रोजेक्ट और टेक्निकल स्किल से जो एआई आसानी से नहीं कर सकता। छोटी कंपनी, अलग शहर या थोड़े अलग क्षेत्र में काम करना कमजोरी नहीं, बल्कि आपकी सबसे बड़ी ताकत बन सकता है।

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