Sunday, April 5, 2026

फारेस्ट गार्ड, जेल प्रहरी के 1679 पदों पर भर्ती का सुनहरा मौका

मप्र कर्मचारी चयन मंडल (एमपीईएसबी) की ओर से फारेस्ट गार्ड, फिल्ड गार्ड, जेल प्रहरी और असिस्टेंट जेल सुपरिटेंडेंट के पदों पर भर्ती के लिए आनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू की गई है। भर्ती प्रक्रिया 1679 पदों पर होगी। इच्छुक उम्मीदवार 30 अप्रैल तक आफिशियल वेबसाइट https://esb.mponline.gov.in/ पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। भर्ती प्रक्रिया एमपी कर्मचारी चयन मंडल द्वारा आयोजित की जा रही है। उम्मीदवारों को आनलाइन आवेदन के साथ-साथ निर्धारित शुल्क भी जमा करना होगा। उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षण और दस्तावेज सत्यापन शामिल होंगे।


भर्ती प्रक्रिया से जुड़ीं अहम जानकारियां

आवेदन शुल्क

  • आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए रजिस्ट्रेशन फीस 500 रुपये।
  • अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए रजिस्ट्रेशन फीस 250 रुपये।


शैक्षणिक योग्यता

  • फारेस्ट गार्ड/फील्ड गार्ड- 10वीं पास
  • जेल प्रहरी 12वीं पास
  • असिस्टेंट जेल सुपरिटेंडेंट - स्नातक (ग्रेजुएशन)

(अलग-अलग पदों के अनुसार योग्यता निर्धारित की गई है।)


ये पद हैं शामिल

  • फारेस्ट गार्ड- 728 पद
  • फील्ड गार्ड-169 पद
  • जेल प्रहरी-757 पद
  • असिस्टेंट जेल सुपरिटेंडेंट-25 पद

कुलपद- 1679


आयु सीमा

  • न्यूनतम आयु- 18 वर्ष
  • अधिकतम आयु-33-38 वर्ष (वर्ग अनुसार) आरक्षित वर्ग को सरकारी नियमों के अनुसार छूट


चयन प्रक्रिया

भर्ती प्रक्रिया में कई चरण होंगे

  1. लिखित परीक्षा (सीबीटी)
  2.  फिजिकल टेस्ट (पीईटी) पीएमटी।
  3. डाक्यूमेंट वेरिफिकेशन
  4. मेडिकल टेस्ट

(कुछ पदों में शारीरिक दक्षता बेहद महत्वपूर्ण है।)


वेतनमान

  • फारेस्ट गार्ड जेल प्रहरी- 19,500-62,000 हजार
  • असिस्टेंट जेल सुपरिंटेंडेंट- 36,200-1,14,800 हजार

(साथ में डीए, एचआरए और अन्य सरकारी भत्ते भी मिलेंगे।)


महत्त्वपूर्ण तिथियां

  • आवेदन शुरू- 28 फरवरी 2026
  • अंतिम तिथि- 30 अप्रैल 2026


ऐसे करें आवेदन

आवेदन करने के लिए सबसे पहले https://esb.mponline.gov.in/ की आफिशियल वेबसाइट पर जाकर विजिट करें। अब वेबसाइट के होमपेज पर क्लिक करके मांगी गई सभी जानकारी को ध्यान से दर्ज कर लें। इसके बाद रजिस्ट्रेशन फीस का भुगतान करें। अब मांगी गए सभी जरूरी दस्तावेजों की स्कैन कापी को अपलोड करें। अंत में इसका एक प्रिंट आउट भी निकाल लें।


तैयारी के टिप्स

  • सबसे पहले यह जानें कि परीक्षा में कौन-कौन से विषय आते हैं। लिखित परीक्षा और शारीरिक परीक्षा दोनों की तैयारी अलग-अलग करनी होगी।
  • पूरा सिलेबस एक साथ न पढ़ें। रोजाना के लक्ष्य तय करें और उसी के अनुसार पढ़ाई के विषय तय करें।
  • गणित और तर्कशक्त्ति (रीजनिंग) के मूल सिद्धांत अच्छे से समझे। बिना बेस मजबूत किए आगे बढ़ना मुश्किल होगा।
  • समसामयिक घटनाओं के साथ रोज अखबार या सामान्य ज्ञान की पत्रिका पढ़ें।
  • विशेष रूप से मप्र से जुड़ी खबरों पर ध्यान दें। परीक्षा का स्तर और प्रकार समझा में आता है। महत्वपूर्ण विषयों की पहचान करना आसान होता है।
  • हर विषय के लिए समय तय करें। अभ्यास करते समयं घड़ी का उपयोग करें।
  • हर सप्ताह कम से कम 1-2 माक टेस्ट दें। अपनी गलतियों का विश्लेषण करें और सुधार करें।
  • महत्वपूर्ण तथ्यों और सूत्रों को लिखकर रखें। अंतिम समय में दोहराने में मदद मिलेगी।
  • रोज पढ़े हुए विषयों को दोहराएं। साप्ताहिक पुनरावृत्ति भी करें।
  • जिस विषय में आप कमज़ोर है। उस पर अधिक समय दें। कठिन विषयों से भार्गे नहीं।
  • पढ़ाई के समय मोबाइल का उपयोग कम करें। सोशल मीडिया से दूरी बनाएं
  • शारीरिक फिटनेस पर ध्यान दें। इस परीक्षा में शारीरिक परीक्षा भी होती है। रोज दौड लगाना शुरू करें। पुश-अप, सिट-अप और अन्य व्यायाम करें। धीरे-धीरे अपनी क्षमता बढ़ाए।
  • सही मार्गदर्शन प्राप्त करें। शिक्षकों, कोचिंग या आनलाइन साधनों की मदद लें। सही दिशा में मेहनत करना जरूरी है।
  • रोज थोड़ा-थोड़ा पढ़ना ज्यादा लाभदायक है। लंबे समय तक ब्रेक न ले।
  • अंतिम समय में सही रणनीति अपनाए। परीक्षा के पास केवल दोहराव (रिवीजन) करे। नए विषय शुरू करने से बचें। आत्मविश्वास बनाए रखें।


नोट: आधिकारिक अधिसूचना/नियम पुस्तिका इस लिंक से डाउनलोड (https://esb.mponline.gov.in) करके ही आवेदन करें।

Saturday, April 4, 2026

तमिलनाडु में जन्मी रिनी संपत बनीं वॉशिंगटन डीसी मेयर चुनाव में पहली दक्षिण एशियाई उम्मीदवार

भारत के तमिलनाडु (थेनी) में जन्मी रिनी संपत ने वॉशिंगटन डीसी के मेयर चुनाव के लिए मतपत्र (ballot) पर जगह बनाकर इतिहास रच दिया है। वह इस पद के लिए चुनाव लड़ने वाली पहली दक्षिण एशियाई उम्मीदवार बन गई हैं।


तमिलनाडु में जन्‍मी सुश्री रिनी संपत वॉशिंगटन डीसी के मेयर के पद के लिए चुनाव लड़ने वाली पहली दक्षिण एशियाई उम्‍मीदवार बन गई हैं। वह वॉशिंगटन के राजनीतिक इतिहास में मील का पत्‍थर साबित हुई हैं। भारत के थेनी में जन्‍मी संपत सात वर्ष के उम्र में अमरीका चली गईं थी।


उन्‍होंने कहा कि यह क्षण उनके लिए व्यक्तिगत और व्यापक सामुदायिक महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि डीसी मेयर पद के लिए चुनाव लड़ने वाली पहली दक्षिण एशियाई नागरिक होना उनके लिए बेहद मायने रखता है।


उनके अभियान ने इस बात की पुष्टि की कि चुनाव में शामिल होने के लिए चार हजार 500 से अधिक लोगों ने उनकी याचिका पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने आशा व्यक्त की कि उनकी उम्मीदवारी दूसरों को चुनाव लड़ने और अपने पड़ोसियों के लिए अच्छा करने के लिए प्रेरित करेगी।


अभियान में दी गई जानकारी के अनुसार 31 वर्षीय संपत सरकारी ठेकेदार हैं, जो करीब एक दशक से वॉशिंगटन में रह रही हैं। उन्होंने अपने अभियान को बुनियादी नागरिक सेवाओं और शासन सुधारों पर केंद्रित किया है।


रिनी संपत के बारे में मुख्य जानकारी:

  • मूल स्थान: उनका जन्म तमिलनाडु के थेनी में हुआ था और वह 7 साल की उम्र में अपने माता-पिता के साथ अमेरिका चली गई थीं।
  • शिक्षा और करियर: वह दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय (USC) की पूर्व छात्र अध्यक्ष (Student Body President) रह चुकी हैं। वर्तमान में 31 वर्षीय रिनी एक सरकारी ठेकेदार के रूप में कार्यरत हैं।
  • चुनाव अभियान: वह डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से चुनाव लड़ रही हैं। उनके अभियान का मुख्य विषय 'Fix the Basics' (बुनियादी सुविधाओं को सुधारना) और 'A New DC' (एक नया डीसी) का विजन है।
  • मुद्दे: उनका ध्यान बुनियादी नागरिक सेवाओं में सुधार, सुरक्षा और सरकारी कार्यक्रमों को नागरिकों के लिए अधिक प्रभावी बनाने पर केंद्रित है।
  • समर्थन: मतपत्र पर अपनी जगह सुनिश्चित करने के लिए उनके अभियान को 4,500 से अधिक लोगों के हस्ताक्षरों का समर्थन प्राप्त हुआ। 


रिनी ने अपनी उम्मीदवारी पर कहा कि एक "बाहरी" (outsider) के रूप में वह किसी विशेष हित समूह की ऋणी नहीं हैं और उनका पूरा ध्यान शहर की बुनियादी सेवाओं को ठीक करने पर रहेगा।

राहुल गांधी ने आज इडुक्की और एर्नाकुलम जिलों में यूडीएफ की चुनावी सभाओं को किया संबोधित

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आज (4 अप्रैल, 2026) केरल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान इडुक्की और एर्नाकुलम जिलों में यूडीएफ (UDF) की चुनावी सभाओं को संबोधित किया।


कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने आज अलाप्पुझा में कहा कि यूडीएफ केरलम में वास्तविक बदलाव लाने के लिए तैयार है। उन्होंने एलडीएफ और एनडीए दोनों की आलोचना करते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव के बाद सत्ताधारी एलडीएफ अप्रासंगिक हो जाएगा। श्री राहुल गांधी ने आज इडुक्की और एर्नाकुलम जिलों में यूडीएफ की चुनावी सभाओं को भी संबोधित किया। 


सीपीआई-मार्क्‍सवादी के महासचिव एम. ए. बेबी और पोलित ब्यूरो सदस्य सुभाषिनी अली ने विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में एलडीएफ के लिए प्रचार किया। श्री बेबी ने कहा कि एलडीएफ ने केरल को कई क्षेत्रों में आगे बढ़ाया है और सीपीआई-एम तुष्टीकरण की राजनीति नहीं करती बल्कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए दृढ़ता से खड़ी है।


राज्‍य में चुनाव प्रचार मंगलवार को समाप्‍त हो रहा है। केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री और प्रमुख प्रचारकों सहित कई प्रमुख नेता प्रचार में जी-जान से जुटे हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कल कोझिकोड, एर्नाकुलम और तिरुअनंतपुरम जिलों में एनडीए के लिए प्रचार करेंगे। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे कल कोल्लम जिले में यूडीएफ के लिए प्रचार में शामिल होंगे।


अपने भाषणों के दौरान उन्होंने सत्ताधारी एलडीएफ (LDF) और भाजपा के बीच "गुप्त गठबंधन" होने का आरोप लगाया। आज के उनके दौरों की मुख्य बातें रही हैं:-

  • एलडीएफ-भाजपा पर हमला: उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के बीच एक "छिपी हुई साझेदारी" है, जिसका उद्देश्य यूडीएफ को हराना है। उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा मुख्यमंत्री विजयन को निशाना क्यों नहीं बना रही है।
  • अल्पसंख्यकों का मुद्दा: गांधी ने मणिपुर और छत्तीसगढ़ में ईसाइयों और अन्य अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों का मुद्दा उठाया और दावा किया कि केरल के मुख्यमंत्री उन ताकतों के साथ खड़े हैं जो देश के अन्य हिस्सों में अल्पसंख्यकों पर हमले कर रही हैं।
  • स्थानीय मुद्दे और वादे:

  1. मानव-वन्यजीव संघर्ष: उन्होंने इडुक्की में मानव-वन्यजीव संघर्ष का स्थायी समाधान निकालने का वादा किया।
  2. किसानों की समस्याएं: उन्होंने किसानों के पट्टे (title deeds) से जुड़ी समस्याओं को हल करने की बात कही।
  • यूडीएफ की 5 गारंटियां: उन्होंने महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा, कॉलेज जाने वाली लड़कियों को 1,000 रुपये मासिक सहायता, 3,000 रुपये सामाजिक पेंशन और परिवारों के लिए 25 लाख रुपये का स्वास्थ्य कवर देने का वादा दोहराया। 


केरल की 140 विधानसभा सीटों के लिए 9 अप्रैल 2026 को मतदान होना है। इसके बाद राहुल गांधी 6 अप्रैल को त्रिशूर जिले में प्रचार करेंगे।

छिंदवाड़ा के दिशा लर्निंग सेंटर से 17 अभ्यर्थियों का सुरक्षा बलों में चयन

पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा एवं उप पुलिस महानिरीक्षक डॉ विनीत कपूर के मार्गदर्शन में प्रदेश के प्रत्येक जिले एवं बटालियन में संचालित दिशा लर्निंग सेंटर के माध्यम से दी जा रही निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण फिजिकल ट्रेनिंग जिले के युवाओं को निरंतर सफलता की ओर अग्रसर कर रही है। यह पहल न केवल युवाओं के आत्मविश्वास को सशक्त कर रही है, बल्कि उन्हें राष्ट्र सेवा के लिए भी प्रेरित कर रही है।


इसी राज्य स्तरीय “दिशा लर्निंग सेंटर” कार्यक्रम के अंतर्गत  छिंदवाड़ा पुलिस द्वारा युवाओं को दी जा रही निःशुल्क फिजिकल ट्रेनिंग का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। पुलिस लाइन छिंदवाड़ा में संचालित इस केंद्र के माध्यम से अभ्यर्थियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए विभिन्न सुरक्षा बलों में चयन प्राप्त कर जिले का नाम गौरवान्वित किया है।


इस उपलब्धि के अंतर्गत कुल 17 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है, जिनमें 11 अभ्यर्थी रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) में तथा 6 अभ्यर्थी SSC GD के माध्यम से बीएसएफ, सीआईएसएफ एवं सीआरपीएफ में चयनित हुए हैं। चयनित अभ्यर्थियों में श्री लोकेश सरियाम, श्री ऋतिक सोनी, श्री सत्येंद्र बालवंशी, श्री अंकित धुर्वे, सुश्री कामिनी परतेती एवं सुश्री साधना पहाड़े ने SSC GD के तहत विभिन्न अर्धसैनिक बलों में सफलता प्राप्त की है, जबकि श्री मनोज वानखेड़े, श्री दिलीप साहू, श्री अभिषेक सोलंकी, श्री अभिषेक सूर्यवंशी, श्री कुलदीप कुमार, श्री राहुल रघुवंशी, श्री कैलाश वनेश्वर, श्री रंजीत साहू, श्री राम घोटे, श्री निकेत साहू एवं सुश्री भावना फकारे का चयन RPF कॉन्स्टेबल के रूप में हुआ है। यह सफलता छिंदवाड़ा पुलिस के सतत प्रयासों, समर्पण एवं प्रभावी मार्गदर्शन का परिणाम है।


छिंदवाड़ा श्री अजय पांडे एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री आशीष खरे के निर्देशन में रक्षित निरीक्षक श्री आशीष तिवारी एवं आरक्षक श्री विजय इनवाती द्वारा अपने नियमित दायित्वों के साथ-साथ विशेष मेहनत एवं प्रतिबद्धता के साथ अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिससे यह उपलब्धि संभव हो सकी। 


उल्लेखनीय है कि “दिशा लर्निंग सेंटर”  केवल फिजिकल ट्रेनिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पुलिस परिवार के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु एक समग्र मंच प्रदान करता है। इस केंद्र में  SSC, व्यापम एवं पुलिस भर्ती से संबंधित 500 से अधिक पुस्तकें, पत्रिकाएं एवं समाचार पत्र उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क वाई-फाई, कंप्यूटर एवं इंटरनेट सुविधा उपलब्ध है, जिससे वे ऑनलाइन अध्ययन एवं शोध कार्य कर सकें। इसके अतिरिक्त, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों एवं विशेषज्ञों द्वारा समय-समय पर करियर काउंसलिंग एवं मोटिवेशनल सत्र आयोजित कर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया जाता है।

जनजातीय क्षेत्रों में होम-स्टे बने आय का साधन, घर बैठे अच्छी कमाई कर रहे हैं होम-स्टे संचालक

मध्यप्रदेश की ग्रामीण संस्कृति के इन्द्रधनुषी रंगों को करीब से देखना और ज्यादा आनंददायी और रोमांचक हो गया है। बड़ी संख्या में बन रहे होम-स्टे में आने वाले पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रदेश में हाई-वे और प्राकृतिक स्थानों के आस-पास के तथा जनजातीय क्षेत्रों में अब बड़ी संख्या में होम-स्टे नजर आ जाते हैं।


मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्रामीण उदयमिता को बढ़ावा देते हुए ग्रामीण पर्यटन की असीम संभावनाओं का दोहन करने की नीति बनाई है। पिछले दो सालों में इससे ग्रामीण अंचलों में रोजगार के बड़े अवसर निर्मित हुए हैं। होम-स्टे से देशी-विदेशी पर्यटकों को ग्रामीण संस्कृति के दर्शन अब सहजता से सुलभ हो गया है।


प्रदेश में 98 चुने गांवों में 346 होम-स्टे ग्रामीणों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं, जबकि 642 होम-स्टे निर्माणाधीन हैं, जो जल्दी ही पर्यटकों के आतिथ्य के लिए तैयार हो जायेंगे। अब तक लगभग 34 हजार देशी-विदेशी पर्यटकों ने होम-स्टे कर ग्रामीण जीवन का प्रत्यक्ष अनुभव लिया। सुखद आवास सुविधा, परम्परागत व्यंजनों का स्वाद, स्थानीय लोक-कला, नृत्य-संगीत, हस्त-कला, हस्त-शिल्प से होम-स्टे संचालक परिवारों को ₹6.76 करोड़ की आय प्राप्त हुई। उन्हें आय का एक गरिमापूर्ण साधन मिल गया। पर्यटकों को खुशियां देने के साथ उनके परिवारों में भी खुशियां आ गईं।


होम-स्टे योजना

पर्यटन विभाग अंतर्गत मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा संचालित ग्रामीण पर्यटन कार्यक्रम एक बहुआयामी योजना है। इसका उददेश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव लाना, गांवों में ही रोजगार के अवसरों का निर्माण करना और ग्रामीण संस्कृति बचाये रखना है। प्रदेश के सांस्कृतिक क्षेत्रों बुन्देलखण्ड, बघेलखण्ड, निमाड़, मालवा, महाकौशल एवं चम्बल की ग्रामीण सांस्कृतिक विरासतों का दर्शन करा रही है। होम-स्टे गांवों में रची-बसी संस्कृति, ग्रामीण आवास विन्यास, परम्परागत व्यंजन, नृत्य संगीत, लोक-कला, हस्त-शिल्प से पर्यटकों को सुखद अनुभव प्रदान करते हैं।


पर्यटन स्थलों से लगे ग्रामों के साथ ही प्राकृतिक, नैसर्गिक सुन्दरता से परिपूर्ण एवं जनजातीय सांस्कृतिक पहचान वाले गावों का चयन कर उन्हें गामीण पर्यटन से जोड़ा गया है। होम-स्टे शहरी पर्यटकों को कम बजट में गांव के शांत और सुरम्य वातावरण में सुखद स्मृतियों से सराबोर करने का काम कर रहे हैं।


मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा होम-स्टे एवं पर्यटन ग्रामों के समेकित विकास एवं विस्तार की दिशा में समय-समय पर हॉस्पिटैलिटी, साफ-सफाई एवं कौशल विकास के तकनीकी प्रशिक्षणों के माध्यम से ग्रामीणों के कौशल उन्नयन में सहयोग दिया जा रहा है। होम-स्टे के प्रचार-प्रसार में डिजिटल एवं आईटी, सोशल मीडिया के उपयोग की दिशा में भी समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाकर क्षमतावर्धन एवं सामुदायिक संगठन में नेतृत्व विकास का कार्य किया गया है। इसका परिणाम है कि पर्यटन ग्रामों के होम-स्टे को ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों से बुकिंग मिल रही है।


सीहोर का ग्राम खारी बना मॉडल पर्यटन ग्राम

भोपाल से लगे सीहोर जिले का ग्राम खारी ने मॉडल पर्यटन ग्राम के रूप में अपनी पहचान बनाई है। यहां लगभग 209 राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय सरकारी एवं गैर-सरकारी प्रतिनिधियों द्वारा समुदाय आधारित ग्रामीण अर्थव्यव्या में पर्यटन ग्रामों के योगदान का अध्ययन किया गया है।


बैतूल जिले के घोड़ा डोंगरी तहसील के "बाचा'' गांव में गणेश उइके एक-डेढ़ साल से ताप्ती विहार होम-स्टे चला रहे हैं। उन्हें ₹2 लाख रूपये का शुद्ध मुनाफा हुआ है। होम-स्टे चलाने का उन्हें अच्छा अनुभव हो गया है। देखते ही देखते "बाचा'' गांव में 8 होम-स्टे खुल गये हैं। सभी में स्थानीय पर्यटकों के अलावा विदेशी पर्यटक भी आने लगे हैं। ग्रामीण संस्कृति के दर्शन करते हुए आराम से रहना और देशी खाना पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण होता है। ज्वार-बाजरे की रोटियां, टमाटर की चटनी, भटे का भरता, देशी सब्जियों के व्यंजन, कोदो-कुटकी की खीर जैसा ग्रामीण खाना, भजन व नृत्य मंडलियों के साथ सहभागिता करना, गायों को चारा खिलाना, दूध दुहना, कुएं से पानी भरना, बैलगाड़ी हांकना जैसी ग्रामीण गतिविधियां पर्यटकों को बहुत लुभाती हैं और हमेशा के लिए सुखदायी स्मृतियां बन जाती हैं।


"बाचा'' के श्री गणेश उइके बताते हैं कि अब तक 500 से ज्यादा परिवार होम-स्टे के लिये आ चुके हैं। इनमें 5 दुबई से आये विदेशी मेहमान भी थे। "बाचा'' की आदर्श पर्यटक समिति के अध्यक्ष श्री अनिल धुर्वे ने बताया कि "बाचा'' गांव नागपुर हाइ-वे से लगा है। यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। हम चाहते हैं कि हमारा स्वागत सत्कार का व्यवसाय और आगे बढ़े।


मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सोच की तारीफ करते हुए श्री धुर्वे बताते हैं कि इससे हमारी रोजगार की समस्या हल हो रही है। आदर्श पर्यटक समिति के अन्य सदस्यों के भी अपने होम-स्टे हैं। जैसे श्री रामदास उइके शिवगंगा होम-स्टे, श्री अंकित का गुलमोहन होम-स्टे, श्री राजेश कुमरे का जयसेवा होम-स्टे, श्री सुधीर ठाकरे का सतपुड़ा होम-स्टे और सुश्री मीनाक्षी धुर्वे का आशीर्वाद होम-स्टे है। सभी में पर्यटकों का आगमन हो रहा है। एक ही गांव में इतने सारे होम-स्टे शायद "बाचा'' में ही हैं। भोपाल से नागपुर हाइ-वे पर होने से यहां पहुंचना आसान है। ऐतिहासिक देवगढ़ का किला है। यहां श्री कैलाश सरके 2023 होम-स्टे चला रहे हैं। अब तक करीब 100 परिवार आ चुके हैं। इनमें फ्रांस के पर्यटक भी शामिल हैं। होटल और बाचा बैतूल बस स्टेंड और रेल्वे स्टेशन से 25 किमी, और भोपाल से 165 किमी है। इसी प्रकार छिंदवाड़ा में नागपुर रोड में उमरानाला से 25 दूर गोंड राजाओं का होम-स्टे का फर्क समझाते हुए श्री कैलाश बताते हैं कि एकमात्र फर्क है वातावरण का। होटल की सुविधाओं का हम मुकाबला नहीं कर सकते लेकिन देशी खाना, व्यंजन, गांव का शांत माहौल, सूर्यादय, सूर्यास्त दर्शन, पक्षियों का कलरव होम-स्टे में मन को खुश करने वाला होती हैं। ऐसी योजना बनाने के लिए हम मुख्यमंत्री डॉ. यादव को धन्यवाद देते हैं। घर बैठे आमदनी का जरिया मिल गया है। होम-स्टे चलाने के लिए हम और भी काम करते हैं। अच्छी बागवानी कर रहे हैं, जिससे ताजा सब्जी मिलती रहे। खेतों को संवार रहे हैं। गांव को स्वच्छ रखने में कोई कसर नहीं छोड़ते। उन्होंने बताया कि हाल में जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह जिले के दौरे पर थे और यहां हमारे गाँवों में भी आये थे। होम-स्टे पर रूके और इसके संचालन और प्रबंधन संबंधी जानकारी ली। उन्होने चाय पी और देवगढ़ का किला देखा। होम-स्टे चलाने की बधाई दी और किसी प्रकार की परेशानी होने पर बेझिझक बताने को भी कहा।


छिन्दवाड़ा जिले में ही तामिया में मनोहारी पातालकोट के पास चिमटीपुर में श्री रूपलाल पंदाराम आंवला होम-स्टे चला रहे हैं। उनके 2 भाई भी दूधीमाता और बाबामड होम-स्टे चला रहे हैं। श्री पंदाराम बताते हैं कि 2 साल पहले वर्ष 2024 से अब तक 100 से ज्यादा पर्यटक यहां आ चुके हैं। इनमें से कुछ पर्यटक कनाडा से भी आये थे। होम-स्टे के पास पातालकोट में बहने वाली दूधी नदी का उदगम और यहां मिलने वाली दुर्लभ जड़ी बूटियों के दर्शन रोमांचकारी अनुभव देते हैं। अब तक करीब ₹3 लाख तक की शुद्ध आय हो चुकी है। इसके अतिरिक्त स्थानीय जनजातीय नर्तक दलों के कलाकारों की भी कमाई हो जाती है। वे गैंडी और सैताम नृत्य करते हैं। खाने में महुआ खीर, महुआ लडडू, कोदो खीर और मक्का और स्थानीय सब्जियां पसंद करते हैं। पर्यटकों की बुकिंग "मेक माय ट्रिप'' के माध्यम से हो जाती है।


इसी प्रकार खरगौन के कसरावद के नावड़ा टौड़ी गांव में नर्मदा तट से लगे कीर्ति केवट होम-स्टे की विशेषता है कि यहां से नर्मदा मैया के दर्शन हो जाते हैं। होम-स्टे की संचालक श्रीमती चंदा बाई केवट बताती हैं कि हर महीने 15 से 20 बुकिंग हो जाती है। अब तक 150 पर्यटक आ चुके हैं जबकि अभी शुरूआत की है। करीब ₹2.50 लाख तक शुद्ध आय हो चुकी है।


होमस्टे पंजीकरण – प्रक्रिया, दस्तावेज़, शुल्क

होम-स्टे (Homestay) योजना भारत सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा शुरू की गई एक पहल है, जिसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय समुदायों को रोजगार देना और पर्यटकों को सस्ती व पारिवारिक आवास सुविधा उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत मकान मालिक अपने घर के अतिरिक्त कमरों को पर्यटकों को किराए पर दे सकते हैं, जिससे उन्हें आय का एक अतिरिक्त स्रोत मिलता है।


प्रमुख सरकारी पहल और श्रेणियां

पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार अपनी 'इन्क्रेडिबल इंडिया होम-स्टे' योजना के तहत आवास इकाइयों को दो श्रेणियों में वर्गीकृत करता है:

  • सिल्वर (Silver): बुनियादी सुविधाओं वाली मानक श्रेणी।
  • गोल्ड (Gold): उच्च गुणवत्ता वाली सुविधाओं और बेहतर सेवाओं वाली श्रेणी। 


राज्यों की प्रमुख योजनाएं

विभिन्न राज्यों ने अपनी भौगोलिक और सांस्कृतिक विशिष्टताओं के आधार पर विशिष्ट योजनाएं शुरू की हैं:

  • उत्तराखंड: यहाँ दीनदयाल उपाध्याय होम-स्टे योजना काफी लोकप्रिय है। इस योजना के तहत पर्वतीय क्षेत्रों में नए होम-स्टे बनाने या पुराने घरों के नवीनीकरण के लिए 50% तक की सब्सिडी (अधिकतम ₹15 लाख) और ऋण पर ब्याज अनुदान दिया जाता है। अधिक जानकारी के लिए यहां जाएं-https://homestay.uttarakhandtourism.gov.in/homestay-policy
  • मध्य प्रदेश: "द रियल इंडिया होम स्टे" योजना के माध्यम से पर्यटकों को ग्रामीण संस्कृति से जोड़ने पर जोर दिया जाता है। यहाँ मकान मालिकों को पंजीकरण के बाद आतिथ्य सत्कार के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाता है। अधिक जानकारी के लिए यहां जाएं- www.mptourism.com
  • हिमाचल प्रदेश: राज्य सरकार ने पंजीकरण के लिए नई वेबसाइट homestay.hp.gov.in लॉन्च की है ताकि प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाया जा सके।
  • उत्तर प्रदेश: हाल ही में 'गंगा ग्रामीण होमस्टे योजना' शुरू की गई है, जो गंगा के किनारे बसे गांवों में पर्यटन को बढ़ावा देती है। यूपी पर्यटन की आधिकारिक वेबसाइट up-tourismportal.in पर ऑनलाइन आवेदन करें।


योजना के मुख्य लाभ

  • आर्थिक लाभ: मकान मालिकों को अपने खाली कमरों से नियमित आय होती है।
  • सब्सिडी और ऋण: कई राज्यों में निर्माण और नवीनीकरण के लिए वित्तीय सहायता और मुद्रा लोन (Mudra Loans) की सुविधा दी जाती है।
  • करों में छूट: कुछ राज्यों (जैसे दिल्ली और गोवा) में होम-स्टे को आवासीय श्रेणी में रखा जाता है, जिससे बिजली, पानी और संपत्ति कर व्यावसायिक दरों के बजाय घरेलू दरों पर देना होता है।
  • सांस्कृतिक विनिमय: यह योजना पर्यटकों को स्थानीय भोजन, परंपराओं और जीवनशैली का प्रत्यक्ष अनुभव लेने का मौका देती है।


पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज (सामान्य सूची)

पंजीकरण प्रक्रिया अब अधिकांश राज्यों में NIDHI+ पोर्टल या संबंधित राज्य पर्यटन की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन होती है। सामान्य तौर पर निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है:

  • आधार कार्ड / पैन कार्ड।
  • घर/भूमि के स्वामित्व के कागजात (खतौनी/रजिस्ट्री)।
  • घर के कमरों, रसोई और शौचालय की तस्वीरें।
  • चरित्र प्रमाण पत्र।
  • अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) या अग्निशामक यंत्र का बिल।

Friday, April 3, 2026

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किए श्री बालाजी श्‍याम सरकार मंदिर में हनुमान जी, श्री खाटू श्‍याम जी के दर्शन

मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव का शुक्रवार को उज्‍जैन प्रवास के दौरान श्री बालाजी श्‍याम सरकार मंदिर में सम्मान किया गया। इस अवसर पर अनेक श्रद्धालु उपस्थित थे। बालाजी श्याम सरकार मंदिर में महंत श्री मनीष पारिख ने मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव का अंगवस्त्रम से सम्‍मान किया।


प्रारंभ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान हनुमान जी, श्री खाटू श्‍याम जी और देवी दुर्गा मां के दर्शन कर पूजा अर्चना की। इस अवसर पर मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश और देश के नागरिकों के कल्याण की कामना की।


उज्जैन के श्री बालाजी श्याम सरकार मंदिर एक प्रमुख धार्मिक स्थल है जो अपनी आध्यात्मिक जीवंतता और भव्य आयोजनों के लिए जाना जाता है। यह मंदिर उज्जैन के जवाहर नगर क्षेत्र में स्थित है।


मुख्य विवरण:

  • महत्व: यह मंदिर विशेष रूप से भगवान बालाजी (हनुमान जी) और बाबा श्याम (खाटू श्याम) की भक्ति के लिए समर्पित है। यहाँ नियमित रूप से संकीर्तन और भजन संध्याओं का आयोजन किया जाता है।
  • प्रमुख आयोजन: यहाँ श्री श्याम वार्षिक फाल्गुन महोत्सव जैसे बड़े उत्सव धूमधाम से मनाए जाते हैं, जिसमें भारी संख्या में भक्त शामिल होते हैं।
  • विशेषता: मंदिर में मासिक संकीर्तन और विशेष तिथियों पर दिव्य आरती का आयोजन होता है, जिससे यह स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण आस्था का केंद्र बना हुआ है।

राज्यस्तरीय खेलवृत्ति के लिए करें आवेदन: स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक के खिलाड़ियों को मिलेगी छात्रवृत्ति

संचालनालय खेल और युवा कल्याण, मध्य प्रदेश द्वारा 01 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच अधिकृत राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं के पदक विजेता खिलाड़ियों से वर्ष 2026 के लिए छात्रवृत्ति हेतु आवेदन आमंत्रित हैं।


प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण, संचालनालय  द्वारा वर्ष 2025 की राज्य स्तरीय खेलवृत्ति के लिए जिले के प्रतिभावान खिलाड़ियों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। यह खेलवृत्ति उन खिलाड़ियों को प्रदान की जाएगी, जिन्होंने 01 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के मध्य आयोजित अधिकृत राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में पदक अर्जित किए हैं।


निर्धारित प्रावधानों के अनुसार स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ियों को 10 हजार रुपए रजत पदक विजेताओं को 8 हजार रुपए तथा कांस्य पदक विजेताओं को 6 हजार रुपए की खेलवृत्ति राशि प्रदान की जाएगी।


जिला खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि पात्रता धारी इच्छुक खिलाड़ी अपने आवेदन पत्र 31 मई 2026 तक कार्यालय जिला खेल परिसर  में जमा कर सकते हैं। आवेदन पत्र एवं संबंधित दिशा-निर्देश कार्यदिवसों में कार्यालय से प्राप्त किए जा सकते हैं।


उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम तिथि के पश्चात प्राप्त होने वाले आवेदनों पर किसी भी प्रकार से विचार नहीं किया जाएगा, अतः पात्र खिलाड़ी समय सीमा का विशेष ध्यान रखें।


विशेष प्रावधान:

  • यह राशि मान्यता प्राप्त राज्य खेल संघों द्वारा आयोजित प्रतियोगिताओं के लिए है।
  • जिन खिलाड़ियों को पूर्व में दो बार यह खेलवृत्ति मिल चुकी है, वे पात्र नहीं हैं।


खेलवृत्ति से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश एवं नियमावली विभाग की आधिकारिक वेबसाइट संचालनालय खेल एवं युवा कल्याण मध्यप्रदेश पर भी उपलब्ध हैं।


प्रमुख विवरण:

  • अंतिम तिथि: 31 मई 2026
  • पात्रता: 19 वर्ष से कम आयु (1 अप्रैल 2026 तक)।
  • आवेदन स्थल: जिला खेल और युवा कल्याण अधिकारी कार्यालय।
  • दस्तावेज़: मूल निवास, पदक प्रमाण पत्र (सत्यापित), 10वीं/जन्म प्रमाण पत्र, आधार, बैंक पासबुक।
  • वेबसाइट: dsywmp.gov.in पर अधिक जानकारी उपलब्ध है।

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