Sunday, March 29, 2026

नई सीड प्रोसेसिंग यूनिट और किसानों के प्रशिक्षण पर दें विशेष ध्यान: मंत्री श्री सारंग

सहकारिता मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने राज्य सहकारी बीज एवं विपणन संघ मर्यादित, भोपाल (बीज संघ) के संचालक मंडल की बैठक में बीज उत्पादन बढ़ाने, गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा किसानों को किफायती दरों पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि बीज संघ द्वारा मक्का, नॉन-जीएम कपास एवं सब्जियों के हाइब्रिड बीजों का उत्पादन एवं विपणन किया जाएगा। किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज बाजार मूल्य की तुलना में लगभग आधी कीमत पर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि इससे किसानों की लागत कम होगी और उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिलेगी।


मंत्री श्री सारंग ने बीज संघ के ‘चीता बीज’ को विश्व स्तरीय ब्रांड के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए बीजों की गुणवत्ता, पैकेजिंग एवं ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा सोशल मीडिया, कृषि मेलों और प्रदर्शनियों के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।


बैठक में बताया गया कि बीज प्रसंस्करण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई सीड प्रोसेसिंग यूनिट एवं कलर सॉर्टेक्स मशीनें स्थापित की जाएंगी। प्रथम चरण में यह कार्य गुना एवं खरगोन में प्रारंभ किया जाएगा, जिसे पैक्स एवं सहकारी समितियों के माध्यम से प्रदेश के अन्य जिलों में विस्तारित किया जाएगा।


 मंत्री श्री सारंग ने निर्देश दिए कि किसानों को बीज उत्पादन के लिए प्रशिक्षित किया जाए। जिन किसानों ने बीज उत्पादन में अच्छा कार्य किया है, उनके माध्यम से अन्य किसानों को प्रशिक्षण दिया जाए तथा प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार बीज उत्पादन योजनाएं तैयार की जाएं। उन्होंने कहा कि बीज संघ आगामी समय में बीज उत्पादन, ब्रांडिंग, प्रसंस्करण एवं विपणन को मजबूत करते हुए किसानों को किफायती दरों पर उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने के लक्ष्य के साथ कार्य करे।


 बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त श्री अशोक वर्णवाल, आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक संस्थाएं श्रीमती शीला दाहिमा, राज्य विपणन संघ के प्रबंध संचालक श्री अभिजीत अग्रवाल, बीज निगम के प्रबंध संचालक श्री महेंद्र दीक्षित सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

साँची विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रोफेसर यज्नेश्वर एस. शास्त्री दर्शन रत्न से सम्मानित

साँची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति, प्रख्यात विद्वान आचार्य प्रोफेसर यज्नेश्वर एस. शास्त्री को प्रतिष्ठित 'दर्शन रत्न' सम्मान से नवाजा गया है। यह सम्मान उन्हें इंटरनेशनल कांग्रेस ऑफ सोशल फिलॉसफी (ICSP) द्वारा दर्शन शास्त्र के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया। मेघालय की नार्थ ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी (NEHU), शिलॉन्ग में 25 मार्च को आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में प्रोफेसर शास्त्री को इस उपाधि से विभूषित किया गया। इस अवसर पर देश-विदेश के दार्शनिकों और विद्वानों ने उनके द्वारा दर्शन जगत में किए गए कार्यों की सराहना की।


दर्शन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान

प्रोफेसर शास्त्री वर्तमान में साँची विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के रूप में मार्गदर्शन देने के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर कार्य कर रहे हैं:

  • शंकर साहित्य का सरलीकरण: वे आदि गुरु शंकराचार्य के गूढ़ साहित्य को जन-सामान्य के लिए सरल और सुबोध भाषा में तैयार करने के मिशन पर काम कर रहे हैं।
  • शोध को प्रोत्साहन: 'शंकर न्यास' के माध्यम से वे युवा शोधार्थियों का निरंतर मार्गदर्शन कर रहे हैं, ताकि भारतीय दर्शन की परंपरा आगे बढ़ सके।
  • अकादमिक नेतृत्व: साँची विश्वविद्यालय में कुलाधिपति के रूप में उनके नेतृत्व में भारतीय ज्ञान परंपरा और बौद्ध दर्शन पर विशेष शोध कार्य किए जा रहे हैं।


इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय परिवार और शिक्षा जगत के विभिन्न दिग्गजों ने प्रोफेसर शास्त्री को बधाई दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मान न केवल प्रोफेसर शास्त्री का है, बल्कि यह भारतीय दर्शन की समृद्ध विरासत का भी सम्मान है।


आचार्य प्रो. डॉ. यज्ञेश्वर एस. शास्त्री

आचार्य प्रोफेसर डॉ. यज्ञेश्वर एस. शास्त्री भारतीय दर्शन, विशेषकर हिंदू, बौद्ध और जैन दर्शन के विश्वप्रसिद्ध विद्वान हैं। प्रोफेसर शास्त्री ने मुंबई विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट की उपाधियाँ प्राप्त की हैं। गुरुकुल में पूर्ण हुई उनकी संस्कृत शिक्षा के परिणामस्वरूप उन्होंने शास्त्री (स्नातक) और आचार्य (स्नातक) की पारंपरिक उपाधियाँ प्राप्त कीं। उनके डॉक्टरेट शोध का विषय विज्ञानवाद बौद्ध धर्म और उपनिषद दर्शन का तुलनात्मक अध्ययन था।


तीस वर्षों से अधिक समय से वे भारत और विदेशों में स्नातकोत्तर स्तर पर अनगिनत छात्रों को उपनिषद दर्शन, अद्वैत वेदांत, महायान बौद्ध धर्म और जैन धर्म में अपना ज्ञान प्रदान कर रहे हैं। 1993 से वे एक अंतरराष्ट्रीय विद्वान के रूप में कई विदेशी विश्वविद्यालयों में अतिथि प्रोफेसर रहे हैं।


अहमदाबाद स्थित गुजरात विश्वविद्यालय में प्रोफेसर शास्त्री ने एक दशक से अधिक समय तक मनोविज्ञान, शिक्षा और दर्शन विभाग के निदेशक के रूप में कार्य किया है। वे भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद (आईसीपीआर) के राष्ट्रीय फेलो और भारत सरकार के भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मनोनीत सदस्य थे। उन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में अध्यक्ष, मुख्य वक्ता और अध्यक्ष के रूप में कार्य किया है।


वर्तमान में, प्रो. शास्त्री निम्नलिखित पदों पर कार्यरत हैं: मध्य प्रदेश के संस्कृति मंत्रालय के आचार्य शंकर संस्कृतिक एकतन्यास के सलाहकार; गुजरात विश्व शांति फाउंडेशन के अध्यक्ष; नालंदा इंटरनेशनल, भारत के निदेशक; सोम-ललित अंतर्राष्ट्रीय विचार केंद्र, अहमदाबाद के निदेशक; सामाजिक दर्शन के अंतर्राष्ट्रीय कांग्रेस के मानद अध्यक्ष; एशियाई दर्शन कांग्रेस के उपाध्यक्ष; और भारत सरकार के भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद के जर्नल के संपादकीय मंडल के सदस्य। वे दर्शनशास्त्र बोर्ड के विशेषज्ञ सदस्य और भारत के प्रमुख विश्वविद्यालयों में पीएचडी रेफरी भी हैं। उन्होंने 18 पीएचडी और 85 से अधिक एमफिल उम्मीदवारों का सफलतापूर्वक मार्गदर्शन किया है।


उन्होंने 18 से अधिक उल्लेखनीय दार्शनिक कृतियों का लेखन किया है, जिनमें शामिल हैं: हिंदू धर्म की नींव; ईशावास्योपनिषद - एक अध्ययन; भारतीय दर्शन और धर्म के अनछुए रास्तों पर भ्रमण; असंग का महायानसूत्रलंकार - विज्ञानवाद बौद्ध धर्म का अध्ययन; उमस्वती वाचक का प्रसमरातिप्रकरण (जैन धर्म पर); वेदांतिक आचार्य के दृष्टिकोण से जैन धर्म; वेदांत और ताओवाद; हिंदू संस्कृति की प्रमुख विशेषताएं; और बौद्ध धर्म और विश्व शांति। उन्होंने 150 से अधिक शोध पत्र भी प्रकाशित किए हैं।


प्रोफेसर शास्त्री कई पुस्तकों और पत्रिकाओं के मुख्य संपादक हैं। उनका एक प्रमुख योगदान ईशावास्योपनिषद पर 51 संस्कृत टीकाओं का संपादन है। उन्होंने ललितत्रिशति शंकरभाष्य का अंग्रेजी अनुवाद सहित संपादन भी किया है।


प्रोफेसर शास्त्री को कई सम्मानों से नवाजा गया है, जिनमें "भारत के प्रख्यात दार्शनिक", "महाहोपाध्याय", "दर्शन विशारद", "करुणाद (कर्नाटक) चेतना", "शांति दूत" और "भारत के प्रख्यात नागरिक" की उपाधियाँ शामिल हैं। उन्हें श्रीमंत नानासाहेब पेशवा पुरस्कार और राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं।


डॉ. शास्त्री संस्कृत, अंग्रेजी, हिंदी, कन्नड़, मराठी और गुजराती सहित कई भाषाओं में धाराप्रवाह हैं।


वर्तमान में वे अपने पुत्र डॉ. योगेश्वर शास्त्री के साथ क्राइस्टचर्च, न्यूजीलैंड में रहते हैं और हिंदू मंदिर और संस्कृति केंद्र में वेदों, वेदांत और संस्कृत का ज्ञान प्रदान करने के लिए सामुदायिक कार्यों में संलग्न हैं।

Saturday, March 28, 2026

मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने मां महागौरी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की

वासंतिक चैत्र नवरात्री की अष्‍टमी ति‍थि‍ पर उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री और गोरक्षपीठाधीश्‍वर योगी आदित्‍यनाथ ने कल गोरखनाथ मंदिर में स्थित शक्तिपीठ में मां महागौरी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। वैदिक मंत्रोच्‍चार के बीच मुख्‍यमंत्री ने राज्‍य के लोगों के कल्‍याण के लिए मां आदि शक्ति जगत जननी की प्रार्थना की तथा गोरक्षपीठ की परंपरा के अनुसार आरती और हवन किया। 


गोरखपुर के प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर में वासंतिक नवरात्र की अष्टमी तिथि पर मुख्यमंत्री और गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने शक्तिपीठ में मां महागौरी की विशेष पूजा-अर्चना की। उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन और आरती कर प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। मंदिर में इस अवसर पर कन्या पूजन का भी अनुष्ठान किया गया। 


अष्टमी पूजा: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माता की आठवीं शक्ति महागौरी की विधि-विधान से पूजा की, जो पवित्रता और शांति का प्रतीक है।

अनुष्ठान: गोरक्षपीठ की परंपरा के अनुसार माता की आरती और लोकमंगल के लिए हवन संपन्न हुआ।

महत्व: चैत्र नवरात्र के दौरान गोरखनाथ मंदिर के शक्तिपीठ में विशेष धार्मिक अनुष्ठान और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है।

कन्‍या पूजन: अष्टमी के दिन ही, मुख्यमंत्री ने कन्याओं के पैर पखारकर और उन्हें भोजन कराकर कन्या पूजन की परंपरा को निभाया। 


गोरखनाथ मंदिर का शक्तिपीठ नाथ पंथ की परंपरा में आध्यात्मिक ऊर्जा का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है।

गोरखनाथ मंदिर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर में स्थित नाथ संप्रदाय का सबसे प्रमुख और पवित्र केंद्र है। यह मंदिर महायोगी गुरु गोरखनाथ को समर्पित है, जिन्हें भगवान शिव का अवतार माना जाता है। 52 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला यह मंदिर न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत है, बल्कि गोरखपुर की सांस्कृतिक पहचान भी है।


मुख्य जानकारी और आकर्षण

अखंड ज्योति: मंदिर के गर्भगृह में एक 'दिव्य ज्योति' जलती रहती है, जिसके बारे में माना जाता है कि यह गुरु गोरखनाथ के समय से ही निरंतर प्रज्वलित है।

खिचड़ी मेला: प्रतिवर्ष मकर संक्रांति (14 जनवरी) के अवसर पर यहाँ एक महीने तक चलने वाला भव्य 'खिचड़ी मेला' आयोजित होता है, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने आते हैं।

भीम सरोवर और मंदिर: मंदिर परिसर में पांडव पुत्र भीम की एक विशाल प्रतिमा और एक सरोवर (भीम सरोवर) स्थित है, जहाँ श्रद्धालु नौका विहार (boating) का आनंद ले सकते हैं।

महंत: वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मंदिर और गोरखनाथ मठ के मुख्य महंत हैं।

गौशाला: परिसर में एक बड़ी गौशाला (Goshala) भी है, जहाँ विभिन्न नस्लों की गायों की सेवा की जाती है।


इतिहास और निर्माण

प्राचीनता: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरु गोरखनाथ ने त्रेता युग में इसी स्थान पर तपस्या की थी।

पुनर्निर्माण: मध्यकाल में अलाउद्दीन खिलजी और औरंगजेब जैसे शासकों द्वारा मंदिर को क्षति पहुँचाई गई थी, लेकिन बाद में महंत दिग्विजय नाथ और महंत अवैद्यनाथ जी के प्रयासों से इसका भव्य आधुनिक स्वरूप तैयार हुआ।


दर्शन के लिए विवरण

समय: मंदिर दर्शन के लिए प्रतिदिन प्रातः 4:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक खुला रहता है।

प्रवेश शुल्क: मंदिर में प्रवेश निःशुल्क है।

स्थान: यह गोरखपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 4 किमी की दूरी पर नेपाल रोड (सोनौली राजमार्ग) पर स्थित है।

अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने विदेश मंत्री जयशंकर और रुबियो से की मुलाकात

अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो G7 विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए फ्रांस पहुंचे। इस मौके पर रुबियो का साथ देने के लिए भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर भी फ्रांस पहुंचे। फ्रांस में उन्होंने रुबियो के साथ-साथ भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से मुलाकात की। इसकी जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी।


मुलाकात की तस्वीरें की साझा

मुलाकात की तस्वीरें साझा कर राजदूत गोर ने लिखा, “फ्रांस में G7 मंत्री स्तरीय मीटिंग के लिए के साथ जुड़कर खुशी हुई। हमारे सहयोगियों और साझेदारों के साथ अच्छी चर्चा हुई।” अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने G7 देशों के विदेश मंत्रियों के साथ इस बैठक में कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान समय-सीमा के अनुसार या उससे आगे चल रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इसके लक्ष्य महीनों नहीं, बल्कि कुछ हफ्तों में पूरे हो जाएंगे। हालांकि, ये बात अमेरिकी सरकार ने पहले भी कही है।


मिशन की शुरुआत से ही स्पष्ट रूपरेखा तय: रुबियो

रुबियो ने कहा कि इस मिशन की शुरुआत से ही स्पष्ट रूपरेखा तय की गई थी। उन्होंने कहा, “हम ईरान की नौसेना को नष्ट करेंगे, उनकी वायुसेना को नष्ट करेंगे। हम मूल रूप से उनकी मिसाइल और ड्रोन बनाने की क्षमता को उनकी फैक्ट्रियों में खत्म कर देंगे।” उन्होंने जोड़ा कि इस अभियान का उद्देश्य “मिसाइल लॉन्चरों की संख्या को काफी कम करना” है, ताकि ईरान “इनके पीछे छिपकर परमाणु हथियार बनाने और दुनिया को धमकाने” में सक्षम न रहे।


रुबियो ने कहा कि प्रगति लगातार हो रही है। “हम इस ऑपरेशन में समय-सीमा के अनुसार या उससे आगे हैं और उम्मीद है कि इसे उचित समय पर महीनों में नहीं, बल्कि कुछ हफ्तों में पूरा कर लिया जाएगा। प्रगति बहुत अच्छी है।”


लक्ष्यों को बिना किसी ग्राउंड टूप्स के हासिल किया: रुबियो

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जमीनी सैनिकों की जरूरत नहीं होगी। इन लक्ष्यों को बिना किसी ग्राउंड टूप्स के हासिल किया जा सकता है। रुबियो ने ऑपरेशन के बाद संभावित जोखिमों की भी चेतावनी दी, खासकर होर्मुज स्ट्रेट में, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। उन्होंने कहा कि ईरान वहां टोल प्रणाली लागू करने की कोशिश कर सकता है, जिसे उन्होंने “अवैध,” “अस्वीकार्य,” और “दुनिया के लिए खतरनाक” बताया।

जनगणना 2027 हेतु फिल्ड ट्रेनर प्रशिक्षण का हुआ शुभारंभ

कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा द्वारा जनगणना 2027 हेतु फिल्ड ट्रेनर प्रशिक्षण का शुभारंभ गत दिवस किया गया। यह प्रशिक्षण 31 मार्च, 2026 में मध्य जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान राजगढ में प्रातः 9.30 से सांय 5.30 तक संचालित होगा। इसमें जनगणना प्रथम चरण जिसमें मकान सूचीकरण, नजरी नक्शा तैयार कर एवं जनगणना एप पर कार्य करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह फिल्ड ट्रेनर चार्ज स्तर पर 01 अप्रैल, 2026 से 22 अप्रैल, 2026 के मध्य प्रगणक एवं सुपरवाईजर को प्रशिक्षण प्रदान करेगें। तदउपरांत प्रगणक, सुपरवाईजर 01 मई, 2026 से 30 मई, 2026 तक प्रथम चरण पर मकान सूचीकरण का कार्य संपन्न करेगें।


प्रशिक्षण में जिला जनगणना अधिकारी श्रीमती ज्योति बगवैया, सहायक जनगणना अधिकारी श्री के.के. राज, श्री शीतल कोसरवाल, श्री असद नजीर एवं स्टॉफ सम्मिलित रहेगे। प्रशिक्षण का संचालन श्री डी.के. साहू एवं श्री देवेन्द्र दुबर्ग द्वारा किया जाएगा।


फील्ड ट्रेनर (Field Trainer)

एक ऐसा पेशेवर होता है जो कर्मचारियों या प्रशिक्षुओं को उनके कार्यस्थल (ऑन-फील्ड) पर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करता है। इनका मुख्य काम किताबी ज्ञान को वास्तविक काम में बदलना होता है। वर्तमान में (मार्च 2026), भारत में जनगणना (Census) के संदर्भ में फील्ड ट्रेनर्स की भूमिका काफी चर्चा में है।


फील्ड ट्रेनर की मुख्य भूमिकाएँ और जिम्मेदारियाँ

व्यावहारिक प्रशिक्षण: ये प्रशिक्षुओं को सीधे कार्यस्थल पर ले जाते हैं और उन्हें काम करने का सही तरीका सिखाते हैं।

जनगणना में भूमिका: जनगणना के दौरान, फील्ड ट्रेनर्स सुपरवाइजर और एन्युमरेटर (गणनाकारों) को मोबाइल ऐप के जरिए डेटा दर्ज करने और गणना की बारीकियां सिखाने के लिए जिम्मेदार होते हैं。

सॉफ्ट स्किल्स और सेल्स: कॉर्पोरेट क्षेत्र में, ये सेल्स टीम को ग्राहकों से बात करने की कला, नेतृत्व क्षमता और रिटेल स्टोर प्रबंधन के गुर सिखाते हैं।

फीडबैक और मूल्यांकन: ये लगातार प्रशिक्षुओं के प्रदर्शन पर नजर रखते हैं और सुधार के लिए तुरंत सुझाव देते हैं।

विशिष्ट विभागों में: पुलिस, रेलवे या स्वास्थ्य सेवाओं में ये नए अधिकारियों को ऑन-ड्यूटी प्रोटोकॉल और सुरक्षा नियमों का अभ्यास कराते हैं। 


फील्ड ट्रेनर के प्रमुख कार्यक्षेत्र

सरकारी योजनाएं: जैसे जनगणना-2027 का प्रशिक्षण कार्यक्रम जो वर्तमान में विभिन्न जिलों (जैसे राजगढ़, छपरा, नालंदा) में चल रहा है।

रिटेल और कॉर्पोरेट: कर्मचारियों को उत्पाद की जानकारी और बिक्री तकनीक सिखाना।

सुरक्षा और पुलिस: नए रंगरूटों को जमीनी स्तर पर गश्त और कानून व्यवस्था संभालने का प्रशिक्षण देना।

रेलवे: ट्रेन मैनेजर्स और लोको पायलटों को सेक्शन लर्निंग और टेक्निकल कपलिंग जैसे कार्य सिखाना।

अग्नि दुर्घटनाओं से बचाव के लिए सतर्कता जरूरी: अपनाएं सरल उपाय, रहें सुरक्षित

जिला प्रशासन द्वारा अग्नि दुर्घटनाओं से बचाव के लिए सतर्कता जरूरी पर बल देते हुए बचाव के उपायों पर आधारित सुझावों का पालन करने का आह्वान करते हुए अपनाएं सरल उपाय, रहें सुरक्षित को रेखांकित किया गया है।


सामान्यतः गर्मी के मौसम में आग लगने की घटनाओं में वृद्धि देखी जाती है, जिससे जन-धन की हानि का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में अग्नि दुर्घटनाओं से बचाव के लिए जागरूकता और सावधानी अत्यंत आवश्यक है। यदि कुछ सरल उपायों को अपनाया जाए तो आग लगने की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।


घर एवं दैनिक जीवन में सावधानियां:

घर में बिजली की खराब या पुरानी वायरिंग को समय-समय पर ठीक करवाना जरूरी है। गैस सिलेंडर को हमेशा सीधा रखें और किसी भी प्रकार का लीकेज होने पर तुरंत गैस बंद करें। खाना बनाते समय गैस या चूल्हे को बिना निगरानी के न छोड़ें और रसोई में आग जलती छोड़कर कहीं न जाएं।


घर में एक छोटा फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशामक यंत्र) अवश्य रखें और उसके उपयोग की जानकारी भी रखें। पेट्रोल, केरोसीन जैसे ज्वलनशील पदार्थों को सुरक्षित स्थान पर रखें। बच्चों को माचिस और लाइटर से दूर रखना भी अत्यंत आवश्यक है।


खेतों में अग्नि सुरक्षा के उपाय:

खेतों में आग से बचाव के लिए चारों ओर 8–10 फीट चौड़ी खाली पट्टी (फायर लाइन) बनाना अत्यंत जरूरी है, जिससे आग को फैलने से रोका जा सके। सूखी घास, पत्ते और कचरा खेत में इकट्ठा न होने दें।


पराली या फसल अवशेष जलाने से आग फैलने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए इसे न जलाएं। खेतों के पास बिजली के ढीले या टूटे तार न हों और उनसे उचित दूरी बनाए रखें। पास में पानी, मिट्टी या बाल्टी की व्यवस्था रखें ताकि आवश्यकता पड़ने पर तुरंत आग बुझाई जा सके। खेतों में जलती हुई बीड़ी या सिगरेट न फेंके।


आपात स्थिति में क्या करें:

यदि आग लग जाए तो तुरंत 101 (फायर ब्रिगेड) पर सूचना दें। गैस और बिजली के कनेक्शन तुरंत बंद करें। छोटी आग को पानी, मिट्टी या कंबल से बुझाने का प्रयास करें, जबकि बड़ी आग की स्थिति में सुरक्षित दूरी बनाए रखें और विशेषज्ञ सहायता का इंतजार करें।


बच्चों के लिए विशेष सावधानी:

बच्चों को माचिस और लाइटर से खेलने से रोकें और उन्हें आग के खतरों के प्रति जागरूक करें। घर में आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) सुनिश्चित करें और बाहर निकलने का रास्ता हमेशा साफ और खुला रखें।


अग्नि दुर्घटनाओं से बचाव के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा उपाय है। छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर हम स्वयं, अपने परिवार और अपनी फसलों को सुरक्षित रख सकते हैं।

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन आज झारखंड का दौरा करेंगे, वर्चुअल रियलिटी केस रिपॉजिटरी का भी शुभारंभ करेंगे

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन आज झारखंड में भारतीय प्रबंधन संस्थान – आईआईएम, रांची के 15वें दीक्षांत समारोह में भाग लेंगे और वर्चुअल रियलिटी केस रिपॉजिटरी का भी शुभारंभ करेंगे।

 

केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे।

 

उपराष्ट्रपति आज बिरसा मुंडा हवाई अड्डे पर पहुंचेंगे और खूंटी के उलिहातु गांव जाएंगे, जो आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा का जन्मस्थान है। वहां वे उनके वंशजों से मिलेंगे और पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। श्री राधाकृष्णन रांची के बिरसा मुंडा परिसर और बिरसा चौक स्थित बिरसा मुंडा की प्रतिमाओं पर भी पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। बाद में, वे आई.आई.एम. रांची के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।


वर्चुअल रियलिटी (VR) केस रिपॉजिटरी से जुड़ी खास बातें

वर्चुअल रियलिटी (VR) केस रिपॉजिटरी एक डिजिटल डेटाबेस है, जो विभिन्न क्षेत्रों—जैसे शिक्षा, चिकित्सा (पुनर्वास), रक्षा, और फोरेंसिक (अपराध स्थल पुनर्निर्माण)—से संबंधित इमर्सिव 3D सिमुलेशन और मामलों का अध्ययन (case studies) संग्रहीत करता है। यह तकनीक उपयोगकर्ताओं को जटिल परिदृश्यों का यथार्थवादी अनुभव प्रदान करती है।

वर्चुअल रियलिटी केस रिपॉजिटरी के मुख्य अनुप्रयोग:

  • चिकित्सा और पुनर्वास (Medical & Rehabilitation): वीआर स्ट्रोक के मरीजों के लिए संज्ञानात्मक पुनर्वास (cognitive rehabilitation) और मोबिलिटी डिवाइस-मिक्स्ड रियलिटी (MD-MR) जैसे नैदानिक ​​परिणाम प्रदान करता है, जो निपुणता और पकड़ की ताकत में सुधार करते हैं।
  • न्यायिक और फोरेंसिक (Forensic & Legal): अपराध स्थल का पुनर्निर्माण (Crime scene reconstruction) करना, जहां 2D छवियों से वर्चुअल टूर बनाकर अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत किए जाते हैं।
  • शिक्षा और प्रशिक्षण (Education & Training): आईआईएम (IIM) जैसे संस्थानों में केस स्टडीज के लिए इस्तेमाल, साथ ही सेना में खतरनाक परिस्थितियों का सुरक्षित अभ्यास।
  • अनुसंधान और विकास (Research): यह एक बहुविषयक क्षेत्र है, जो वर्चुअल, ऑगमेंटेड (AR) और मिक्स्ड रियलिटी (MR) पर मौलिक शोध प्रकाशित करता है।


प्रमुख उपयोगकर्ता और लाभ:

  • शिक्षक और छात्र: जटिल विषयों को 3D में समझने के लिए।
  • चिकित्सक: मरीजों के पुनर्वास के लिए (गेमिफाइड वीआर)।
  • जांचकर्ता: अपराध दृश्यों के डिजिटल विश्लेषण के लिए।


सीमाएं:

यह एक महंगी तकनीक है, और इसके लंबे समय तक उपयोग से आंखों और मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। 

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