Thursday, April 2, 2026

प्रार्थना भोई का राष्ट्रीय सेलिंग कैंप में चयन, देश के श्रेष्ठ खिलाड़ियों के साथ प्रशिक्षण का मिला मौका

जिला खेल परिसर, स्टेडियम विदिशा की प्रतिभावान खिलाड़ी कु. प्रार्थना भोई ने वाटर स्पोर्ट्स (सेलिंग) में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए जिले का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। उन्होंने 18 से 21 मार्च 2026 तक गोवा में आयोजित सेलिंग प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। विदिशा की प्रार्थना भोई एक उभरती हुई भारतीय एथलीट हैं, जिन्होंने सेलिंग (Sailing) के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है।


जिला खेल अधिकारी श्री प्रदीप सिंह रावत ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रार्थना भोई वर्तमान में वाटर स्पोर्ट्स अकादमी भोपाल में रहकर प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। उनके निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन आगामी 3 अप्रैल 2026 से गोवा में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय सेलिंग टीम के प्रशिक्षण कैंप के लिए किया गया है।


राष्ट्रीय स्तर के इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने के लिए प्रार्थना भोई गोवा के लिए रवाना हो रही हैं, जहां वे देश के श्रेष्ठ खिलाड़ियों के साथ प्रशिक्षण प्राप्त करेंगी। उनकी इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर जिला खेल परिसर, विदिशा के समस्त प्रशिक्षकों एवं खिलाड़ियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।


प्रार्थना भोई के बारे में कुछ मुख्य जानकारियां 

  • दोहरा कौशल: प्रार्थना मूल रूप से कुश्ती की खिलाड़ी थीं, लेकिन लगभग एक साल पहले उन्होंने मध्य प्रदेश राज्य सेलिंग अकादमी (भोपाल) जॉइन की और सेलिंग की दुनिया में कदम रखा।
  • स्वर्ण पदक विजेता: उन्होंने चेन्नई में आयोजित ऑल इंडिया विंड सर्फिंग चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक (Gold Medal) जीतकर इतिहास रचा है।
  • राष्ट्रीय चयन: हाल ही में फरवरी 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के कारण उनका चयन राष्ट्रीय सेलिंग कैंप के लिए भी हुआ है।
  • उपलब्धि: अपनी मेहनत और छोटी उम्र में ही उन्होंने सेलिंग जैसे चुनौतीपूर्ण खेल में राष्ट्रीय स्तर पर जिले और प्रदेश का मान बढ़ाया है।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना कार्यक्रम में सम्मिलित होने 18 अप्रैल तक जमा कर सकते हैं आवेदन

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना (आदिवासी समुदाय के लिए) के तहत वर्ष 2026-27 में जिला स्तरीय कार्यक्रम गोंड गुरूआ बाबा (तारानगर) न्यास ग्राम पंचायत धामधूसर तहसील गौहरगंज में 23 अप्रैल 2026 को अतिरिक्त तिथि निर्धारित की गई है। 


जिला पंचायत सीईओ श्री कमल सोलंकी द्वारा सामूहिक विवाह आयोजन हेतु आयोजक जनपद पंचायत सीईओ औबेदुल्लागंज और नोडल अधिकारी श्री मनोज बॉथम उप संचालक सामाजिक न्याय विभाग को बनाया गया है। सामूहिक विवाह में सम्मिलित होने वाले वर-वधु द्वारा आवेदन फार्म शासन द्वारा निर्धारित पात्रता मापदण्ड शर्तो के अधीन 02 अप्रैल से 18 अप्रैल 2026 तक जनपद पंचायत कार्यालय औबेदुल्लागंज में जमा किए जा सकते हैं।


निर्धारित तिथि उपरांत प्राप्त आवेदन मान्य योग्य नहीं होंगे। सामूहिक विवाह हेतु प्राप्त आवेदनों की संख्या शासन द्वारा निर्धारित अधिकतम संख्या 200 से अधिक होने की स्थिति में पहले आओ पहले पाओ के माध्यम से जोड़ो का चयन किया जाएगा। चयन प्रक्रिया उपरांत सामूहिक विवाह में सम्मिलित होने वाले वैवाहिक जोड़ों की सूची का प्रकाशन 20 अप्रैल 2026 तक किया जाएगा।  


आवश्यक दस्तावेज: आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, बीपीएल राशन कार्ड, कन्या का बैंक खाता विवरण और पासपोर्ट साइज फोटो।


आवेदन प्रक्रिया: आप आधिकारिक वेबसाइट (राज्य अनुसार) के माध्यम से ऑनलाइन या संबंधित विकासखंड कार्यालय में ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं।

Monday, March 30, 2026

इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग इकोसिस्टम को बढ़ावा देने ‘लीफ’ लॉन्च

केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के चार्जिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। भारी उद्योग मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने सोमवार को ‘लीफ’ यानी ‘लाइट इलेक्ट्रिक-व्हीकल एक्सेलेरेशन फोरम (एलईएएफ)’ लॉन्च किया, जो एक इंडस्ट्री-नेतृत्व वाला मंच है। 


यह फोरम एक निष्पक्ष प्लेटफॉर्म

यह फोरम एक निष्पक्ष प्लेटफॉर्म के रूप में बनाया गया है, जहां लाइट इलेक्ट्रिक वाहन (एलईवी) सेक्टर से जुड़े सभी स्टेकहोल्डर्स, जैसे वाहन निर्माता (ओईएम), चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर ऑपरेटर, कंपोनेंट निर्माता और टेक्नोलॉजी प्रदाता, एक साथ काम कर सकें।


देश में इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों को अपनाने में लाएगा तेजी 

यह फोरम सरकार, रेगुलेटरी संस्थाओं और इंडस्ट्री संगठनों के साथ मिलकर ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को बढ़ावा देगा और देश में इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों को अपनाने में तेजी लाएगा।


यह पहल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के विकास को करेगी तेज 

मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि यह पहल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के विकास को तेज करेगी और बेहतर इंटरऑपरेबिलिटी, भरोसेमंद सिस्टम और विस्तृत चार्जिंग नेटवर्क के जरिए ईवी इकोसिस्टम को मजबूत बनाएगी।


यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन के अनुरूप

उन्होंने कहा कि यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन के अनुरूप है और इससे सतत (सस्टेनेबल) मोबिलिटी को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी मदद मिलेगी। कुमारस्वामी ने यह भी कहा कि एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी ईवी इकोसिस्टम बनाने के लिए सरकार और उद्योग के बीच बेहतर सहयोग बेहद जरूरी है।


इस पहल का मकसद 

इस पहल का मकसद चार्जिंग नेटवर्क के बीच बेहतर तालमेल (इंटरऑपरेबिलिटी) बनाना, सिस्टम की विश्वसनीयता बढ़ाना और यूजर्स को एक समान अनुभव देना है, साथ ही सार्वजनिक चार्जिंग सुविधाओं का विस्तार करना भी है।


यह सिस्टम यूनिफाइड कनेक्टर के जरिए स्लो और फास्ट दोनों तरह की चार्जिंग को करेगा सपोर्ट 

इसके तहत ‘लाइट इलेक्ट्रिक कंबाइंड चार्जिंग सिस्टम (एलईसीसीएस)’ जैसे कदम उठाए जा रहे हैं, जिसे भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने मंजूरी दी है। यह सिस्टम एक यूनिफाइड कनेक्टर के जरिए स्लो और फास्ट दोनों तरह की चार्जिंग को सपोर्ट करेगा।


ईवी सेक्टर की 20 से ज्यादा कंपनियों को जोड़ चुका है यह फोरम

यह फोरम अब तक ईवी सेक्टर की 20 से ज्यादा कंपनियों को जोड़ चुका है, जिनमें वाहन निर्माता, चार्जिंग ऑपरेटर, सप्लायर्स और सॉफ्टवेयर कंपनियां शामिल हैं। आने वाले समय में इसमें और संगठनों के जुड़ने की उम्मीद है।


इंडस्ट्री विशेषज्ञों का कहना है कि देश में ईवी अपनाने की रफ्तार बढ़ रही है, ऐसे में चार्जिंग नेटवर्क की असमानता और यूजर अनुभव में अंतर जैसी चुनौतियों को दूर करना जरूरी होगा। उन्होंने यह भी कहा कि बेहतर इंटरऑपरेबिलिटी और मजबूत सार्वजनिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर ही देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेजी से आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।

भारत की शीतल देवी को चुना गया ‘पैरा आर्चर ऑफ द ईयर’

भारत की शीतल देवी को विश्‍व तीरंदाजी ने वर्ष 2025 का सर्वश्रेष्ठ पैरा तीरंदाज चुना है। जम्मू-कश्मीर की 19 वर्षीय शीतल देवी पिछले साल दक्षिण कोरिया के ग्वांगझू में आयोजित विश्‍व पैरा तीरंदाजी चैंपियनशिप में महिला कंपाउंड व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली और एकमात्र बिना बाजू वाली तीरंदाज बनीं।


शीतल देवी को वर्ल्ड आर्चरी ने ‘पैरा आर्चर ऑफ द ईयर’ चुना है, जिसके बाद भारतीय तीरंदाज ने दिल से आभार जताया है। वैश्विक शासी निकाय ने पिछले एक साल में इस खेल में उनके बेहतरीन प्रदर्शन और योगदान के लिए शीतल देवी को इस खिताब से सम्मानित किया है।


शीतल देवी का यह पुरस्कार एक ऐतिहासिक सीजन की शानदार परिणति है, जिसमें उन्होंने ग्वांगजू में आयोजित वर्ल्ड आर्चरी पैरा चैंपियनशिप में अपना पहला विश्व खिताब जीता था। वह बिना हाथों के पैरा आर्चरी विश्व चैंपियनशिप जीतने वाली पहली महिला बनी, उन्होंने कंपाउंड महिला व्यक्तिगत फाइनल में पैरालंपिक चैंपियन ओज्नुर क्यूर गिर्दी को हराया। इसके अलावा, उन्होंने महिला टीम स्पर्धा में रजत और मिश्रित टीम प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता।


शीतल देवी साल 2025 में ‘बीबीसी इमर्जिंग एथलीट ऑफ द ईयर’ पुरस्कार जीतने वाली पहली भारतीय तीरंदाज बनीं। यह सम्मान उन्हें पेरिस 2024 पैरालंपिक गेम्स में राकेश कुमार के साथ मिश्रित टीम में कांस्य पदक जीतने के बाद मिला। देवी को 2023 में ‘वर्ल्ड आर्चरी पैरा वुमन ऑफ द ईयर’ और एशियाई पैरालंपिक समिति की सर्वश्रेष्ठ युवा एथलीट के रूप में भी मान्यता मिली है। साल 2024 में उन्हें ‘अर्जुन पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।


अपने करियर में एक और माइलस्टोन जोड़ते हुए, शीतल देवी ने दिसंबर में इतिहास रच दिया। उन्हें जेद्दा में होने वाले एशिया कप के लिए भारत की ‘एबल-बॉडीड’ (शारीरिक रूप से सक्षम) कंपाउंड आर्चरी टीम में चुना गया, जो उनके असाधारण कौशल और बहुमुखी प्रतिभा को और भी अधिक रेखांकित करता है।


शीतल देवी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पैरा तीरंदाजों के साथ नामित होना और अब वर्ल्ड आर्चरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ पैरा तीरंदाज चुना जाना, यह एहसास बहुत ही खास है। मेरा दिल आभार, भावनाओं और इस सफर में मिली हर चीज से भरा हुआ है। धन्यवाद।”


फोकोमेलिया (जन्मजात शारीरिक विकार) के साथ जन्मी देवी बिना हाथों के एक अनोखी तकनीक का इस्तेमाल करके प्रतिस्पर्धा करती हैं। यह तरीका अपनी मौलिकता और सटीकता के कारण दुनिया भर का ध्यान खींच चुका है।


उनके पदकों की झोली में कई बड़े टूर्नामेंट्स शामिल हैं, जिनमें एशियन चैंपियनशिप, एशियन पैरा गेम्स, वर्ल्ड चैंपियनशिप और पैरालंपिक गेम्स शामिल हैं, जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनके बढ़ते कद को उजागर करते हैं।

Sunday, March 29, 2026

नई सीड प्रोसेसिंग यूनिट और किसानों के प्रशिक्षण पर दें विशेष ध्यान: मंत्री श्री सारंग

सहकारिता मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने राज्य सहकारी बीज एवं विपणन संघ मर्यादित, भोपाल (बीज संघ) के संचालक मंडल की बैठक में बीज उत्पादन बढ़ाने, गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा किसानों को किफायती दरों पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि बीज संघ द्वारा मक्का, नॉन-जीएम कपास एवं सब्जियों के हाइब्रिड बीजों का उत्पादन एवं विपणन किया जाएगा। किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज बाजार मूल्य की तुलना में लगभग आधी कीमत पर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि इससे किसानों की लागत कम होगी और उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिलेगी।


मंत्री श्री सारंग ने बीज संघ के ‘चीता बीज’ को विश्व स्तरीय ब्रांड के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए बीजों की गुणवत्ता, पैकेजिंग एवं ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा सोशल मीडिया, कृषि मेलों और प्रदर्शनियों के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।


बैठक में बताया गया कि बीज प्रसंस्करण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई सीड प्रोसेसिंग यूनिट एवं कलर सॉर्टेक्स मशीनें स्थापित की जाएंगी। प्रथम चरण में यह कार्य गुना एवं खरगोन में प्रारंभ किया जाएगा, जिसे पैक्स एवं सहकारी समितियों के माध्यम से प्रदेश के अन्य जिलों में विस्तारित किया जाएगा।


 मंत्री श्री सारंग ने निर्देश दिए कि किसानों को बीज उत्पादन के लिए प्रशिक्षित किया जाए। जिन किसानों ने बीज उत्पादन में अच्छा कार्य किया है, उनके माध्यम से अन्य किसानों को प्रशिक्षण दिया जाए तथा प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार बीज उत्पादन योजनाएं तैयार की जाएं। उन्होंने कहा कि बीज संघ आगामी समय में बीज उत्पादन, ब्रांडिंग, प्रसंस्करण एवं विपणन को मजबूत करते हुए किसानों को किफायती दरों पर उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने के लक्ष्य के साथ कार्य करे।


 बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त श्री अशोक वर्णवाल, आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक संस्थाएं श्रीमती शीला दाहिमा, राज्य विपणन संघ के प्रबंध संचालक श्री अभिजीत अग्रवाल, बीज निगम के प्रबंध संचालक श्री महेंद्र दीक्षित सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

साँची विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रोफेसर यज्नेश्वर एस. शास्त्री दर्शन रत्न से सम्मानित

साँची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति, प्रख्यात विद्वान आचार्य प्रोफेसर यज्नेश्वर एस. शास्त्री को प्रतिष्ठित 'दर्शन रत्न' सम्मान से नवाजा गया है। यह सम्मान उन्हें इंटरनेशनल कांग्रेस ऑफ सोशल फिलॉसफी (ICSP) द्वारा दर्शन शास्त्र के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया। मेघालय की नार्थ ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी (NEHU), शिलॉन्ग में 25 मार्च को आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में प्रोफेसर शास्त्री को इस उपाधि से विभूषित किया गया। इस अवसर पर देश-विदेश के दार्शनिकों और विद्वानों ने उनके द्वारा दर्शन जगत में किए गए कार्यों की सराहना की।


दर्शन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान

प्रोफेसर शास्त्री वर्तमान में साँची विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के रूप में मार्गदर्शन देने के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर कार्य कर रहे हैं:

  • शंकर साहित्य का सरलीकरण: वे आदि गुरु शंकराचार्य के गूढ़ साहित्य को जन-सामान्य के लिए सरल और सुबोध भाषा में तैयार करने के मिशन पर काम कर रहे हैं।
  • शोध को प्रोत्साहन: 'शंकर न्यास' के माध्यम से वे युवा शोधार्थियों का निरंतर मार्गदर्शन कर रहे हैं, ताकि भारतीय दर्शन की परंपरा आगे बढ़ सके।
  • अकादमिक नेतृत्व: साँची विश्वविद्यालय में कुलाधिपति के रूप में उनके नेतृत्व में भारतीय ज्ञान परंपरा और बौद्ध दर्शन पर विशेष शोध कार्य किए जा रहे हैं।


इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय परिवार और शिक्षा जगत के विभिन्न दिग्गजों ने प्रोफेसर शास्त्री को बधाई दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मान न केवल प्रोफेसर शास्त्री का है, बल्कि यह भारतीय दर्शन की समृद्ध विरासत का भी सम्मान है।


आचार्य प्रो. डॉ. यज्ञेश्वर एस. शास्त्री

आचार्य प्रोफेसर डॉ. यज्ञेश्वर एस. शास्त्री भारतीय दर्शन, विशेषकर हिंदू, बौद्ध और जैन दर्शन के विश्वप्रसिद्ध विद्वान हैं। प्रोफेसर शास्त्री ने मुंबई विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट की उपाधियाँ प्राप्त की हैं। गुरुकुल में पूर्ण हुई उनकी संस्कृत शिक्षा के परिणामस्वरूप उन्होंने शास्त्री (स्नातक) और आचार्य (स्नातक) की पारंपरिक उपाधियाँ प्राप्त कीं। उनके डॉक्टरेट शोध का विषय विज्ञानवाद बौद्ध धर्म और उपनिषद दर्शन का तुलनात्मक अध्ययन था।


तीस वर्षों से अधिक समय से वे भारत और विदेशों में स्नातकोत्तर स्तर पर अनगिनत छात्रों को उपनिषद दर्शन, अद्वैत वेदांत, महायान बौद्ध धर्म और जैन धर्म में अपना ज्ञान प्रदान कर रहे हैं। 1993 से वे एक अंतरराष्ट्रीय विद्वान के रूप में कई विदेशी विश्वविद्यालयों में अतिथि प्रोफेसर रहे हैं।


अहमदाबाद स्थित गुजरात विश्वविद्यालय में प्रोफेसर शास्त्री ने एक दशक से अधिक समय तक मनोविज्ञान, शिक्षा और दर्शन विभाग के निदेशक के रूप में कार्य किया है। वे भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद (आईसीपीआर) के राष्ट्रीय फेलो और भारत सरकार के भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मनोनीत सदस्य थे। उन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में अध्यक्ष, मुख्य वक्ता और अध्यक्ष के रूप में कार्य किया है।


वर्तमान में, प्रो. शास्त्री निम्नलिखित पदों पर कार्यरत हैं: मध्य प्रदेश के संस्कृति मंत्रालय के आचार्य शंकर संस्कृतिक एकतन्यास के सलाहकार; गुजरात विश्व शांति फाउंडेशन के अध्यक्ष; नालंदा इंटरनेशनल, भारत के निदेशक; सोम-ललित अंतर्राष्ट्रीय विचार केंद्र, अहमदाबाद के निदेशक; सामाजिक दर्शन के अंतर्राष्ट्रीय कांग्रेस के मानद अध्यक्ष; एशियाई दर्शन कांग्रेस के उपाध्यक्ष; और भारत सरकार के भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद के जर्नल के संपादकीय मंडल के सदस्य। वे दर्शनशास्त्र बोर्ड के विशेषज्ञ सदस्य और भारत के प्रमुख विश्वविद्यालयों में पीएचडी रेफरी भी हैं। उन्होंने 18 पीएचडी और 85 से अधिक एमफिल उम्मीदवारों का सफलतापूर्वक मार्गदर्शन किया है।


उन्होंने 18 से अधिक उल्लेखनीय दार्शनिक कृतियों का लेखन किया है, जिनमें शामिल हैं: हिंदू धर्म की नींव; ईशावास्योपनिषद - एक अध्ययन; भारतीय दर्शन और धर्म के अनछुए रास्तों पर भ्रमण; असंग का महायानसूत्रलंकार - विज्ञानवाद बौद्ध धर्म का अध्ययन; उमस्वती वाचक का प्रसमरातिप्रकरण (जैन धर्म पर); वेदांतिक आचार्य के दृष्टिकोण से जैन धर्म; वेदांत और ताओवाद; हिंदू संस्कृति की प्रमुख विशेषताएं; और बौद्ध धर्म और विश्व शांति। उन्होंने 150 से अधिक शोध पत्र भी प्रकाशित किए हैं।


प्रोफेसर शास्त्री कई पुस्तकों और पत्रिकाओं के मुख्य संपादक हैं। उनका एक प्रमुख योगदान ईशावास्योपनिषद पर 51 संस्कृत टीकाओं का संपादन है। उन्होंने ललितत्रिशति शंकरभाष्य का अंग्रेजी अनुवाद सहित संपादन भी किया है।


प्रोफेसर शास्त्री को कई सम्मानों से नवाजा गया है, जिनमें "भारत के प्रख्यात दार्शनिक", "महाहोपाध्याय", "दर्शन विशारद", "करुणाद (कर्नाटक) चेतना", "शांति दूत" और "भारत के प्रख्यात नागरिक" की उपाधियाँ शामिल हैं। उन्हें श्रीमंत नानासाहेब पेशवा पुरस्कार और राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं।


डॉ. शास्त्री संस्कृत, अंग्रेजी, हिंदी, कन्नड़, मराठी और गुजराती सहित कई भाषाओं में धाराप्रवाह हैं।


वर्तमान में वे अपने पुत्र डॉ. योगेश्वर शास्त्री के साथ क्राइस्टचर्च, न्यूजीलैंड में रहते हैं और हिंदू मंदिर और संस्कृति केंद्र में वेदों, वेदांत और संस्कृत का ज्ञान प्रदान करने के लिए सामुदायिक कार्यों में संलग्न हैं।

Saturday, March 28, 2026

मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने मां महागौरी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की

वासंतिक चैत्र नवरात्री की अष्‍टमी ति‍थि‍ पर उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री और गोरक्षपीठाधीश्‍वर योगी आदित्‍यनाथ ने कल गोरखनाथ मंदिर में स्थित शक्तिपीठ में मां महागौरी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। वैदिक मंत्रोच्‍चार के बीच मुख्‍यमंत्री ने राज्‍य के लोगों के कल्‍याण के लिए मां आदि शक्ति जगत जननी की प्रार्थना की तथा गोरक्षपीठ की परंपरा के अनुसार आरती और हवन किया। 


गोरखपुर के प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर में वासंतिक नवरात्र की अष्टमी तिथि पर मुख्यमंत्री और गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने शक्तिपीठ में मां महागौरी की विशेष पूजा-अर्चना की। उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन और आरती कर प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। मंदिर में इस अवसर पर कन्या पूजन का भी अनुष्ठान किया गया। 


अष्टमी पूजा: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माता की आठवीं शक्ति महागौरी की विधि-विधान से पूजा की, जो पवित्रता और शांति का प्रतीक है।

अनुष्ठान: गोरक्षपीठ की परंपरा के अनुसार माता की आरती और लोकमंगल के लिए हवन संपन्न हुआ।

महत्व: चैत्र नवरात्र के दौरान गोरखनाथ मंदिर के शक्तिपीठ में विशेष धार्मिक अनुष्ठान और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है।

कन्‍या पूजन: अष्टमी के दिन ही, मुख्यमंत्री ने कन्याओं के पैर पखारकर और उन्हें भोजन कराकर कन्या पूजन की परंपरा को निभाया। 


गोरखनाथ मंदिर का शक्तिपीठ नाथ पंथ की परंपरा में आध्यात्मिक ऊर्जा का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है।

गोरखनाथ मंदिर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर में स्थित नाथ संप्रदाय का सबसे प्रमुख और पवित्र केंद्र है। यह मंदिर महायोगी गुरु गोरखनाथ को समर्पित है, जिन्हें भगवान शिव का अवतार माना जाता है। 52 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला यह मंदिर न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत है, बल्कि गोरखपुर की सांस्कृतिक पहचान भी है।


मुख्य जानकारी और आकर्षण

अखंड ज्योति: मंदिर के गर्भगृह में एक 'दिव्य ज्योति' जलती रहती है, जिसके बारे में माना जाता है कि यह गुरु गोरखनाथ के समय से ही निरंतर प्रज्वलित है।

खिचड़ी मेला: प्रतिवर्ष मकर संक्रांति (14 जनवरी) के अवसर पर यहाँ एक महीने तक चलने वाला भव्य 'खिचड़ी मेला' आयोजित होता है, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने आते हैं।

भीम सरोवर और मंदिर: मंदिर परिसर में पांडव पुत्र भीम की एक विशाल प्रतिमा और एक सरोवर (भीम सरोवर) स्थित है, जहाँ श्रद्धालु नौका विहार (boating) का आनंद ले सकते हैं।

महंत: वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मंदिर और गोरखनाथ मठ के मुख्य महंत हैं।

गौशाला: परिसर में एक बड़ी गौशाला (Goshala) भी है, जहाँ विभिन्न नस्लों की गायों की सेवा की जाती है।


इतिहास और निर्माण

प्राचीनता: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरु गोरखनाथ ने त्रेता युग में इसी स्थान पर तपस्या की थी।

पुनर्निर्माण: मध्यकाल में अलाउद्दीन खिलजी और औरंगजेब जैसे शासकों द्वारा मंदिर को क्षति पहुँचाई गई थी, लेकिन बाद में महंत दिग्विजय नाथ और महंत अवैद्यनाथ जी के प्रयासों से इसका भव्य आधुनिक स्वरूप तैयार हुआ।


दर्शन के लिए विवरण

समय: मंदिर दर्शन के लिए प्रतिदिन प्रातः 4:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक खुला रहता है।

प्रवेश शुल्क: मंदिर में प्रवेश निःशुल्क है।

स्थान: यह गोरखपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 4 किमी की दूरी पर नेपाल रोड (सोनौली राजमार्ग) पर स्थित है।

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